सोशल मीडिया से फैलती घातक बीमारी (एडीएचडी)

एडीएचडी अर्थात अटेन्टशन डेफिसिट हाइपर एक्टीविटी डिस्ऑर्डर (एडीएचडी) से दिमाग इतना कमजोर हो रहा है कि कि 15 से 28 साल के 80 प्रतिशत सोशल मीडिया यूजर एडीएचडी से ग्रस्त हैं।

बीमारी है बेकाबू गुस्सा, कैसे हो कंट्रोल?

मेडिकल साइंस के मुताबिक क्रोध (गुस्सा) खतरे के प्रति एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, हमारे अस्तित्व के लिये गुस्सा जरूरी है, लेकिन उस स्थिति में मनोविकार बन जाता है जब इस पर नियन्त्रण न रहे।

Vaastu Shastra के नियमों के अनुसार गलती से भी ना करें ये काम, वरना पड़ेगा महंगा…

शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जो वास्तु शास्त्र के नियमों की अनदेखी करना चाहता हो. वास्तु शास्त्र में हर तरह की नियम हैं जिसमें एक सुई से लेकर दीवारों के रंगों तक का जीवन पर असर पड़ता है….

मौत से बचाती है वैक्सीन

कई महीनों के अध्ययन के बाद केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि कोरोना वायरस की वैक्सीन संक्रमितों की मौत की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है।

लत कोई हो, समय पर इलाज जरूरी अन्यथा…..

लत का दिमाग पर ऐसा असर होता है कि आत्म-नियन्त्रण (सेल्फ कंट्रोल) खत्म होने के साथ इमोशन मरने लगते हैं जिससे वह किसी की परवाह नहीं करता।

स्टेरॉइड्स: जिंदगी खोखली, बरबाद हो सकती

स्टेरॉइड को लेकर अजीबोगरीब भ्रान्तियां हैं किसी के लिये जादुई दवा और किसी के लिये जानलेवा  मुसीबत।

क्या है डाउन सिन्ड्रोम बीमारी?

डाउन सिंड्रोम के साथ जन्मे बच्चे और उनके माता-पिता बहुत कठिन जीवन बिताते हैं, ऐसे में डाउन सिंड्रोम की सम्भावना समाप्त करने के लिये जरूरी है कि लोगों में इस बाबत जागरूकता बढ़े विशेषरूप से उन जोड़ों में जो पहली बार माता-पिता बनने जा रहे हैं।

कोलेस्ट्रॉल: जरूरी मगर जानलेवा

कोलेस्ट्रॉल हमेशा जानलेवा नहीं होता बल्कि हमारे जीवन के लिये यह बहुत जरूरी तत्व है और बिना इसके स्वस्थ रहना सम्भव ही नहीं। कोलेस्ट्रॉल से स्वस्थ कोशिकाओं, विशेष हारमोन्स, विटामिन डी, भोजन पचाने में सहायक एन्जाइम व कोशिकाओं के सुचारू संचालन के लिये अनेक रसायनों का निर्माण होता है।

डिस्परूनिया से संभव छुटकारा, बर्शते…..

डिस्परूनिया के कई कारण हैं कुछ महिलाओं में यह किसी फिजिकल प्रॉब्लम का संकेत है और कुछ में किसी इमोशनल फैक्टर का। यदि फिजिकल कारणों की बात करें तो यह मुख्यत: मेनोपॉज से हुए वजाइनल ड्राइनेस (योनि में सूखापन), चाइल्ड बर्थ, ब्रेस्टफीडिंग, गलत मेडीकेशन और सम्भोग से पहले उत्तेजना में कमी से होती है।

किडनी खराब के संकेत महीनों पहले से

Signs of kidney failure : आम समझ है कि यह खून साफ करके जहरीले तत्वों को यूरीन के जरिये शरीर से बाहर निकालती है। वास्तविकता में यह खून साफ करने के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण कार्य करती है जैसेकि शरीर में सोडियम-पोटेशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का सही स्तर बनाये रखना और पानी की मात्रा बैलेंस करना। इसके अलावा ब्लड प्रेशर कंट्रोल, हड्डियों के लिये जरूरी विटामिन डी और लाल रक्त कणिकाओं के उत्पादन में सहायक हारमोन्स बनाना। इन कामों के लिये किडनी में अरबों नेफ्रोन्स होते हैं जो अपने विशिष्ट स्ट्रक्चर से इन्हें अंजाम देते हैं।  यह भी पढ़ें: वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स खास परिस्थितियां छोड़ दें तो किडनी में खराबी के संकेत इसके पूरी तरह खराब होने के कुछ महीने पहले से मिलने लगते हैं, यदि इस दौरान सही इलाज मिल जाये तो किडनी ठीक हो सकती है। किडनी के सम्बन्ध में आम समझ है कि यह खून साफ करके जहरीले तत्वों को यूरीन के जरिये शरीर से बाहर निकालती है। वास्तविकता में यह खून साफ करने के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण कार्य करती है जैसेकि शरीर में सोडियम-पोटेशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का सही स्तर बनाये रखना और पानी की मात्रा बैलेंस करना। इसके अलावा ब्लड… Continue reading किडनी खराब के संकेत महीनों पहले से

एक्सपर्ट ने कहा स्तनपान कराने वाली महिलाएं बेझिझक लगवाएं कोविड-19 का टीका

स्तनपान कराने वाली माताओं को बिना किसी झिझक के कोविड-19 प्रतिरोधी टीका लगवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी उपलब्ध टीके कोविड-19 के नए वेरिएंट के खिलाफ काफी हद तक प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 विषाणु, इन्फ्लुएंजा की तरह कुछ समय बाद अपने स्थानिक चरण में पहुंच सकता है।

सदमें से मनोदशा की बीमारी (पीटीएसडी)

इसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है। यह वास्तव में खतरनाक घटनाओं (थ्रेटनिंग इवेंट) के सम्पर्क में आने के बाद दिमाग में रासायनिक और न्यूरोनल परिवर्तनों की प्रतिक्रिया से होता है। ज्यादातर लोगों पर ऐसी घटनाओं का असर नहीं होता लेकिन कुछ में ये दिमागी परिवर्तन कर देती हैं जिससे वे पीटीएसडी से ग्रस्त हो जाते हैं। सन 2018 में हुए एक शोध के मुताबिक ऐसे लोगों में स्ट्रेस से जुड़े हारमोन्स के स्तर में परिवर्तन होने से वे ओवररियेक्टिव फाइट ऑर फ्लाइट रिस्पांस की भावना से भर जाते हैं। पीटीएसडी पीड़ित होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति में दिमागी या शारीरिक तौर पर कमजोरी आ गयी है। पीटीएसडी यानी किसी दर्दनाक घटना से लगा सदमा। ऐसे सदमे की वजह एक्सीडेंट, अपने की मृत्यु, प्राकृतिक आपदा (भूकम्प, सुनामी, तूफान इत्यादि), फिजिकल या सेक्सुअल हमला या मिलिटरी कॉम्बेट जैसी घटनायें होती हैं। इससे ग्रस्त लोगों में खतरे की बढ़ी हुई भावना की वजह से फाइट या फ्लाइट रिस्पांस बहुत तीव्र हो जाता है। पीटीएसडी पीड़ित सुरक्षित होने पर भी तनावग्रस्त या भयभीत महसूस करते हैं। युद्ध में भाग ले चुके सैनिक अक्सर इस मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं और इनके संदर्भ में पीटीएसडी को… Continue reading सदमें से मनोदशा की बीमारी (पीटीएसडी)

दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी!

देश में पहली बार दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक का प्रयोग डा. गौरव गोयल की देखरेख में हुआ।.. इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी के क्षेत्र में ऐसी क्रांति आयी है कि पहले जो ऑपरेशन 8 से 10 घंटे में सफलता की 30 प्रतिशत उम्मीद से किये जाते थे अब उन्हें 99 प्रतिशत सफलता के साथ 1 घंटे में किया जाता है वह भी बिना चीर-फाड़ के। यह भी पढ़ें: वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स treatment brain stroke : दिमाग में क्लॉट हो, नस फट जाये (हेमरेज) या ब्रेन ट्यूमर हो  तो  क्या आप सोच सकते हैं कि बिना चीर-फाड़ किये इन्हें ठीक किया जा सकता है? लेकिन अब ये सम्भव है और ऐसा हुआ है ब्रेन सर्जरी की नयी तकनीक न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी से। इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी के क्षेत्र में ऐसी क्रांति आयी है कि पहले जो ऑपरेशन 8 से 10 घंटे में सफलता की 30 प्रतिशत उम्मीद से किये जाते थे अब उन्हें 99 प्रतिशत सफलता के साथ 1 घंटे में किया जाता है वह भी बिना चीर-फाड़ के। इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी करने वाले देश के चोटी के डाक्टरों में शुमार डा. गौरव गोयल (डायरेक्टर एंव हैड इंस्टीट्यूट… Continue reading दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी!

वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स

कोरोना महामारी से पहले हुई रिसर्च के मुताबिक प्रोबॉयोटिक हमें अल्सर, इन्टसटाइन कैंसर, डाइबिटीज टाइप-2, चर्म रोग और कई गम्भीर मानसिक बीमारियों से बचाते हैं लेकिन कोरोना के बचाव और इलाज में इनकी उपयोगिता सामने आने पर जरूरी हो जाता है कि लोगों को प्रोबॉयोटिक्स की सही जानकारी हो जिससे वे अपना खान-पान ठीक रखकर शरीर में इनकी जरूरी संख्या हमेशा बनाये रखें और रोग मुक्त रहें। यह भी पढ़ें: हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला! कोविड-19 (कोरोना) वायरस का इलाज खोजते हुए वैज्ञानिकों ने जब प्रोबॉयोटिक्स पहलू पर रिसर्च शुरू की तो पता चला कि वायरस साइटोकाइन स्टार्म के जरिये पाचन तन्त्र में मौजूद गट फ्लोरा (गुड बैक्टीरिया) नष्ट करते हुए इम्युटी कम करता है। साथ ही आंतों और फेफड़ों के नेचुरल लिंक गट-लंग्स एक्सेस को तोड़कर फेफड़ों में खुद को तेजी से रिप्लीकेट करते हुए ऑक्सीजन लेवल गिराता है। ऐसे में वैज्ञानिकों का मत है कि अगर पाचन तन्त्र में मौजूद गुड बैक्टीरिया को कमजोर न पड़ने दें तो कोरोना से बचाव के साथ संक्रमित होने पर जल्द ठीक हो सकते हैं।   कोरोना महामारी से पहले हुई रिसर्च के मुताबिक प्रोबॉयोटिक हमें अल्सर, इन्टसटाइन कैंसर, डाइबिटीज टाइप-2, चर्म रोग और कई गम्भीर मानसिक बीमारियों से बचाते हैं… Continue reading वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स

हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला!

ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हुए कुछ मरीजों में हरपीज सिम्पलेक्स वायरस का स्ट्रेन मिला जो तेजी से एक से दूसरे में फैलता है यह लाइलाज पेनफुल (दर्दनाक) सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्शन हैं। मेडिकल साइंस में एचएसवी कही जाने वाली इस संक्रामक बीमारी को दवाओं से शांत कर सकते हैं, ठीक नहीं।  एचएसवी वायरस से हरपीज सिम्पलेक्स नामक संकामक बीमारी पनपती है, जो आमतौर पर मुंह, चेहरे और जननांगों को अपनी चपेट में लेती है, वैसे ये शरीर में कहीं भी हो सकती है। यह भी पढ़ें: जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर जैसे-जैसे कोरोना म्यूटेट होकर नये-नये वैरियेन्ट प्रकट कर रहा है वैसे-वैसे डा. फाउची (अमेरिकी राष्ट्रपति के मेडिकल सलाहकार) का शक, हकीकत बनता जा रहा है कि कोरोना वायरस किसी जानवर या पक्षी से नहीं आया बल्कि इसे लैब में खतरनाक वायरसों के जीन्स मिलाकर बनाया गया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडेन ने सीआईए सहित सभी अमेरिकन खुफिया एजेन्सियों को छह महीने की समय सीमा में इस बात की सच्चाई पता लगाने के आदेश दिये हैं।  ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हुए कुछ मरीजों में हरपीज सिम्पलेक्स वायरस का स्ट्रेन मिला जो तेजी… Continue reading हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला!

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