नई दिल्ली। सामाजिक-आर्थिक असमानताएं उम्र बढ़ने और मनोभ्रंश से जुड़ी मस्तिष्क संरचना और कनेक्टिविटी में बदलाव का कारण बन सकती हैं। एक अध्ययन में ये बातें सामने आई है। ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि असमानता का सीधा संबंध घटे ब्रेन वॉल्यूम से है। यह विशेष रूप से टेम्पोरो-पोस्टीरियर और सेरिबेलर क्षेत्रों में बाधित कनेक्टिविटी का कारण भी बन सकता है – जो स्मृति और संज्ञानात्मक कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। निष्कर्ष से पता चला है कि अल्जाइमर (Alzheimer) रोग से पीड़ित लोगों पर सबसे गंभीर असर पड़ता है। इसके विपरीत, शोधकर्ताओं ने फ्रंटोटेंपोरल लोबार डिजनरेशन में हल्के प्रभाव देखे। यह अधिक महत्वपूर्ण आनुवंशिक प्रभाव के कारण हो सकता है। नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित शोधपत्र में टीम ने कहा कि मनोभ्रंश के रोगियों में मस्तिष्क की मात्रा और कनेक्टिविटी में कमी अक्सर देखी जाती है और यह रोग की प्रगति और गंभीरता से जुड़ी होती है। उल्लेखनीय रूप से टीम ने शिक्षा, आयु, लिंग और संज्ञानात्मक क्षमता जैसे व्यक्तिगत कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी एक लिंक पाया। यह मस्तिष्क स्वास्थ्य को आकार देने में मैक्रो-स्तरीय कारकों की स्वतंत्र भूमिका को रेखांकित करता है।
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ट्रिनिटी कॉलेज (Trinity College) में वैश्विक मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रोफेसर डॉ. अगस्टिन इबनेज ने कहा कि यह शोध मस्तिष्क स्वास्थ्य को आकार देने में संरचनात्मक असमानता की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। इबनेज ने कहा कि विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में मनोभ्रंश दरों में वृद्धि को देखते हुए, हमारे निष्कर्ष मस्तिष्क स्वास्थ्य असमानताओं के मूल कारणों को संबोधित करने के लिए टार्गेट इंटरवेंशन (लक्ष्य आधारित हस्तक्षेप ) की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जो प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशिष्ट प्रतीत होते हैं। निष्कर्ष वैश्विक मस्तिष्क स्वास्थ्य अनुसंधान में स्वास्थ्य के व्यक्तिगत सामाजिक निर्धारकों के साथ-साथ सामाजिक और शारीरिक चर को एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। इनमें लोकतांत्रिक शासन, वायु प्रदूषण, प्रवास, जलवायु परिवर्तन और हरित स्थानों तक पहुंच जैसे चर शामिल हो सकते हैं। इन क्षेत्र-विशिष्ट मॉड्युलेटरों की पहचान और समाधान से लक्षित हस्तक्षेप हो सकता है, जिससे त्वरित मस्तिष्क वृद्धावस्था को कम किया जा सकता है और वंचित समुदायों में मनोभ्रंश के बोझ को कम किया जा सकता है।
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