नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने शुक्रवार को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल परीक्षण सेंटर से अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया। शनिवार को डीआरडीओ की ओर से इस मिसाइल के सफल परीक्षण की जानकारी दी गई। बताया गया है कि इस मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री एंट्री व्हीकल यानी एमआईआरवी सिस्टम लगाया गया है, जिससे एक साथ कई परमाणु हथियारों को ले जाया जा सकता है।
इसकी खास बात यह है कि इस मिसाइल से एक बार में कई टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अलग अलग जगहों पर मौजूद कई टारगेट्स को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। ये सभी टारगेट हिंद महासागर क्षेत्र में फैले हुए थे। खबरों के मुताबिक यह भारत की दूसरी इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम है। इसकी रेंज करीब पांच से सात हजार किलोमीटर तक है। इसकी स्पीड इतनी ज्यादा है कि दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना लगभग नामुमकिन है।
बहरहाल, अग्नि सीरीज में भारत के पास एक, दो, तीन, चार और पांच मिसाइलें हैं। अग्नि-पांच भारत की पहली आईसीबीएम है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। ये भारत के पास मौजूद लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक है। दुनिया के छह देशों अमेरिका, रूस, चीन, भारत, फ्रांस और ब्रिटेन के पास आईसीबीएम की तकनीक है।


