नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जंग स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए कतर में वार्ता हुई है। ईरान के वार्ताकारों की टीम कतर पहुंची थी। इससे पहले कतर ने भी अपने दूत ईरान भेजे थे। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वे ईरान के साथ ओबामा जैसा समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि या तो अच्छा समझौता होगा या फिर कुछ भी नहीं होगा। माना जा रहा है कि शुरुआती सहमति बनने के बाद स्थायी शांति के लिए अंतिम दौर की वार्ता पाकिस्तान में हो सकती है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले समझौते की आलोचना करने वाले नेताओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘जिन्हें ईरान के साथ होने वाले समझौते के बारे में कुछ भी नहीं पता है, वे भी इसकी बुराई कर रहे हैं’। ट्रंप ने कहा कि ये लोग कमजोर हैं और सिर्फ देश को बांटते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका संभावित समझौता 2015 के परमाणु समझौते जैसा नहीं होगा। उन्होंने ओबामा के समझौते को आपदा बताया और दावा किया कि उससे ईरान के लिए परमाणु हथियार तक पहुंचने का रास्ता खुल गया था।
बहरहाल, ईरान की ओर संसद यानी मजलिस के प्रमुख मोहम्मद बाघेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कतर की राजधानी दोहा पहुंचे थे, जहां अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए आरंभिक सहमति बनाने की बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज की खाड़ी को दोबारा खोलने और ईरान के यूरेनियम भंडार पर रहा।
ईरान की ओर से कहा गया है कि बातचीत में कुछ मुद्दों पर तरक्की हुई है, लेकिन अभी किसी बड़े नतीजे का दावा नहीं किया जा सकता। ईरान ने कहा कि परमाणु मुद्दों पर अलग से 60 दिनों तक बातचीत जारी रहेगी। ईरान पर से पाबंदी हटाने, विदेशों में जब्त ईरानी फंड और यूरेनियम संवर्धन को लेकर अब भी बड़े मतभेद बने हुए हैं। इस बीच भारत के दौरे पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक समाधान की हर संभव कोशिश करेगा, उसके बाद ही किसी दूसरे विकल्प पर विचार होगा। अंतिम समझौता होने तक अमेरिकी पाबंदी जारी रहेगी। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे में 32 जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकाले हैं।
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