नई दिल्ली। दिल्ली में 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी यूएपीए के तहत गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत पर सोमवार को फैसला आ सकता है। शनिवार को बताया गया कि दिल्ली दंगे की साजिश के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम सहित अन्य की जमानत याचिकाओं पर पांच जनवरी को सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। उमर खालिद का मामला हाल में फिर चर्चा में आया था, जब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने उनको चिट्ठी लिख कर उनके प्रति समर्थन जताया।
बहरहाल, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने 10 दिसंबर को इन आरोपियों की अलग अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें पेश कीं, जबकि आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा।
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर यूएपीए के साथ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि ये आरोपी फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मास्टरमाइंड थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सात सौ से अधिक लोग घायल हुए थे। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी के खिलाफ हो रहे व्यापक प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की थी।


