नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इस साल 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधयेक पेश किए गए थे। हालांकि सरकार उसे पास कराने में कामयाब नहीं हुई थी। अब बताया जा रहा है कि इसी महीने एक बार फिर सरकार संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
इस सत्र में नारी शक्ति वंदन कानून को बदलने के लिए 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इसके अलावा परिसीमन से जुड़े दो बिल पेश किए जाएंगे। ये ही तीनों बिल अप्रैल के विशेष सत्र में भी पेश किया गया था। चूंकि 131वां संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरुरत है। इसलिए पिछली बार बिल पास नहीं हो पाया था। उसके बाद से तृणमूल कांग्रेस और शिव सेना में टूट हुई है, जबकि कांग्रेस औऱ डीएमके अलग अलग हो गए हैं।
जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार ने जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटा लिया है। गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हुआ था, लेकिन इसका अब तक सत्रावसान नहीं किया गया है। इसलिए विशेष सत्र बुलाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जरुरत नहीं है। सरकार एक हफ्ते पहले सूचना देकर विशेष सत्र आहूत कर सकती है।
बहरहाल, दो तिहाई बहुमत जुटा लेने के दावे के बरक्स वास्तविक स्थिति देखें तो अब भी सरकार इससे दूर है। इस समय लोकसभा की दो सीटें खाली हैं यानी 541 सांसद हैं। इनमें से एनडीए के 318 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए 360 वोट चाहिए। अगर डीएमके के 22 सांसद बिल का समर्थन करते हैं तो बिल के समर्थन में 340 सांसद हो जाएंगे। इसके बाद भी भाजपा को लगभग 20 सांसदों की जरूरत है। ऐसे ही राज्यसभा में एनडीए के 153 सांसद हैं। वहां बिल पास कराने के लिए 162 सांसद चाहिए। वहां भी एनडीए को नौ सांसदों की जरूरत पड़ेगी। हालांकि वहां संख्या जुटा लेना ज्यादा आसान है।
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