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भारत कर सकता है सीओपी की मेजबानी

ByNI Desk,
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नई दिल्ली। पांच साल बाद भारत संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन की मेजबानी कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत की ओर से 2028 में जलवायु परिवर्तन पर कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज यानी सीओपी-33 की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। गौरतलब है कि अभी दुबई में सीओपी-28 की बैठक चल रही है। यह बैठक 12 दिसंबर तक चलेगी। प्रधानमंत्री मोदी एक दिसंबर को इस सम्मेलन में शामिल हुए। सीओपी की बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से भी मुलाकात की।

बहरहाल, भारत की मेजबानी का प्रस्ताव रखते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों की भागीदारी से ‘कार्बन सिंक’ बनाने पर केंद्रित ‘ग्रीन क्रेडिट’ पहल की शुरुआत की। दुबई में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर दुनिया के सामने बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है, जो तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपने निर्धारित योगदान या राष्ट्रीय योजनाओं को हासिल करने के रास्ते पर है।

शुक्रवार को सुबह के सत्र में मोदी ने अमीर देशों पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। किसी देश का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि सदियों पहले चंद देशों के किए की कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जो भी देश ज्यादा कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए विकासशील और गरीब देशों को निस्वार्थ होकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करनी चाहिए। मोदी ने आगे कहा- भारत ने इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन का उदाहरण दुनिया के सामने पेश किया है। 17 फीसदी आबादी के बावजूद कार्बन उत्सर्जन में हमारी हिस्सेदार सिर्फ चार फीसदी है। हमारा लक्ष्य 2030 तक कार्बन उत्सर्जन 45 फीसदी तक घटाना है। भारत ने ग्लोबल बायो फ्यूल एलायंस बनाया। उन्होंने कहा- क्लाइमेट फाइनेंस फंड को मिलियन से बढ़ाकर ट्रिलियन डॉलर तक करना चाहिए।

सीओपी-28 के अध्यक्ष सुल्तान अल जाबेर और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के अध्यक्ष साइमन स्टिल के साथ आरंभिक पूर्ण सत्र में शामिल होने वाले नरेंद्र मोदी एकमात्र नेता थे। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ‘पर्यावरण के लिए जीवन शैली’ की वकालत करते हुए देशों से धरती-अनुकूल जीवन पद्धतियों को अपनाने और गहन उपभोक्तावादी व्यवहार से दूर जाने का आग्रह किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण कार्बन उत्सर्जन को दो अरब टन तक कम कर सकता है। मोदी ने कहा कि सभी के हितों की रक्षा की जानी चाहिए और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सभी की भागीदारी जरूरी है।

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