नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए सात महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक नई ‘प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल’ (टीएसआई) शुरू की है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
विदेश मंत्रालय द्वारा बुधवार को साझा किए गए टीएसआई दस्तावेज़ के अनुसार, दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) द्वारा समन्वित किए जाने वाले टीएसआई भारत-यूके रोडमैप 2030 में निर्धारित महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय सहयोग एजेंडे पर काम करेंगे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (सीईटी) में सहयोग को और अधिक स्पष्ट रूप से सामने लाएंगे। प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल का विस्तार और इसमें गहनता लाने के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों दूरसंचार, महत्वपूर्ण खनिज, अर्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम, जैव एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, और उन्नत सामग्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन यह इतने तक ही सीमित नहीं है।
एनएसए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निर्धारित करेंगे और सीईटी पर सहयोग के लिए अंतरनिर्भरता की पहचान करेंगे जो सार्थक प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला साझेदारी बनाने में मदद करेंगे और डिप्टी एनएसए छमाही आधार पर प्रगति की समीक्षा करेंगे। सीईटी में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक द्विपक्षीय तंत्र भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें प्रासंगिक लाइसेंसिंग या नियामक मुद्दों का समाधान शामिल है। मौजूदा सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों देशों ने कहा कि वे इस मजबूत नींव पर सामूहिक रूप से चौथी औद्योगिक क्रांति को आकार देने का प्रयास करेंगे जो नागरिकों के स्वास्थ्य, कल्याण और समृद्धि को बेहतर बनाएगी, ऐसे तरीकों से जो लोकतंत्र और शांति का समर्थन करते हैं।
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