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ईरान के साथ शांति समझौता ‘बेहद मुश्किल: अमेरिका

होर्मुज जलडमरूमध्य, समुद्री सुरक्षा और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने बुधवार को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ किया है कि देश पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले का उसी ताकत से या उससे भी ज्यादा आक्रामक जवाब दिया जाएगा।

दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ किसी शांति समझौते पर पहुंचने की संभावनाओं को बेहद कठिन बताया है। श्री रुबियो ने ईरान के साथ कूटनीतिक सहमति बनाने में आ रही जटिलताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि शांति समझौते की राह बहुत मुश्किलों से भरी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं करता, तब तक अमेरिका उस पर आर्थिक प्रतिबंध और दबाव जारी रखेगा। अमेरिका की मुख्य मांग यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और ईरान परमाणु हथियार न बनाने की पक्की गारंटी दे।

वहीं, ईरान ने फिर दोहराया है कि किसी भी नए सैन्य दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में एक व्यापक सैन्य संघर्ष छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों में आग लग गई। ये टैंकर ईरानी सेना की बिछाई गई समुद्री सुरंगों की चपेट में आ गए थे।

आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘सिपाह न्यूज’ के मुताबिक, इन जहाजों ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने के लिए ईरान के प्रतिबंधित या ‘गैर-कानूनी’ घोषित रास्ते का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि सुरंगों से भरे इस जलमार्ग में उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, जिसमें उनके जहाजों की तबाही भी शामिल है। इस घटना से जुड़े दावों की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

आईआरजीसी ने यह दावा भी किया है कि ईरानी वायु रक्षा तंत्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है और उसकी सेनाएं इस जलमार्ग की कड़ी निगरानी जारी रखेंगी।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने कहा है कि ईरान किसी भी सैन्य हमले को बिना जवाब दिए बर्दाश्त नहीं करेगा। तेहरान में संवाददाताओं से बात करते हुए श्री बघाई ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया कि ईरान अमेरिकी कार्रवाई पर चुप रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘हमला करो और भाग जाओ’ का दौर अब खत्म हो चुका है।

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श्री बघाई ने सोशल मीडिया पर चल रही उन सूचनाओं को भी बेबुनियाद बताया, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ने ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर हमला करने के अपने इरादे से ईरान को अवगत कराया है। इस स्थान को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा माना जाता है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका इस ठिकाने को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट किया है कि वे आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। इसके जवाब में ईरान का रुख कायम है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

दोनों देशों के बीच का यह ताजा टकराव अब मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर आकर टिक गया है, जो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। हमलों की धमकियों के बीच ईरान ने इस जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर काफी हद तक रोक लगा दी है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है। ईरान ने साफ कह दिया है कि जब तक अमेरिका अपना रुख बदलकर युद्ध खत्म करने और नुकसान के मुआवजे समेत उसकी मांगें पूरी नहीं करता, तब तक यह जलमार्ग नहीं खोला जाएगा।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान और कतर जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से अप्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत जारी है। इसके बावजूद, समुद्री सुरक्षा, सैन्य अभियानों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मूलभूत मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख में काफी बड़ा फासला बना हुआ है।

एक तरफ अमेरिका के कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव और दूसरी तरफ ईरान की जवाबी धमकियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्रीय सुरक्षा व वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बेहद संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण फिलहाल बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण हल की संभावनाएं अनिश्चित दिखाई दे रही हैं।

Pic Credit : UNI

By Naya India

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