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नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, भारत में जब जब सत्ता बदली लोगों में उम्मीद जगी कि अब तो उनके अच्छे दिन आएंगे..लेकिन झूठ फरेब, कुर्सी से चिपके रहने का लालच देश का बंटाधार करता रहा और मई 2014 में तो ऐसी उम्मीद जगी थी मानो युग बदल जाएगा..लेकिन हकीकत में हुआ क्या..वहीं जो पहले हुआ..इसलिए अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है….
भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!
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