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वोटर काटने में फॉर्म सात से भी धांधली

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बहाने वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने के मामले में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कठघरे में खड़ा कर रहे राहुल गांधी ने कुछ नए आरोप लगाए हैं। उन्होंने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में बदलाव को लेकर पहली बार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस का नाम लिया। राहुल ने कहा कि टीसीएस को किसने आदेश दिया? टीसीएस में किसने बदलाव के आदेश पर दस्तखत किए? राहुल ने इसके अलावा फॉर्म सात का दुरुपयोग कर कर्नाटक में बड़ी संख्या में नाम काटे जाने के मुद्दा भी उठाया।

राहुल गांधी ने गुरुवार को फॉर्म छह के बाद अब कर्नाटक में फॉर्म सात के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि कर्नाटक में एक झटके में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने गुरुवार की शाम को एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि नाम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म सात से एक झटके में कर्नाटक में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने यह भी दावा किया कि सुनियोजित तरीके से एससी, एसटी, मुस्लिम,और ओबीसी समाज के लोगों के नाम काटे गए हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि सेंट्रलाइज्ड तरीके से और कंप्यूटर के जरिए भाजपा थोक में फॉर्म सात भर कर मतदाताओं के नाम कटवा रही है।

इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिख कर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि फॉर्म छह में अवैध तरीके से बदलाव किया गया। राहुल ने पूछा, ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टीसीएस को बदलाव करने का आदेश किसने दिया और कंपनी में इसे किसने मंजूरी दी’? उन्होंने आगे पूछा, ‘क्या टीसीएस पर कोई दबाव था’? राहुल के इस आरोप को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीवी श्रीनिवास ने कहा कि कंप्यूटर अपने आप कोई काम नहीं कर सकता है। उसे कमांड देनी पड़ती है। गौरतलब है कि तकनीकी सलाह और सहयोग के लिए चुनाव आयोग ने टीसीएस की सेवाएं ली हैं।

गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म छह में अतिरिक्त जानकारी मांगने और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कानून में बदलाव का अधिकार संसद को है। इस विवाद के बाद आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं। जिन राज्यों में एसआईआर खत्म हो गई है वहां चुनाव आयोग ने फॉर्म छह में मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी का कॉलम हटा दिया है।

By NI Desk

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