एसआईआर में गलती तो चुनाव कैसे सही?
अब साफ है कि मुख्य चुनाव आयुत ज्ञानेश कुमार के कार्यालय से सब कुछ संचालित हो रहा था। पूरे देश के मतदाताओं की कुंजी दिल्ली में उनके कार्यालय में थी। सब कुछ इतना सेंट्रलाइज्ड था कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को भी भनक नहीं थी। ऐसा लग रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यालय चुनिंदा लोगों के नाम काटने के लिए कृत संकल्प था। तभी दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस पर हैरानी जताई है कि पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों से मंजूरी के बाद जो नाम जोड़े गए उनके खिलाफ अपील का फैसला किसने किया? ऐसे अनेक सवाल ‘द इंडियन...