Election Commission

  • भाजपा का काम आसान कर रहा है आयोग

    पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का संगठन कमजोर है और बहुत मजबूत नेता भी नहीं है। इसके बावजूद पिछले दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनावों से उसको 40 फीसदी के आसपास वोट मिल रहा है। इसका कारण यह है कि राज्य में 30 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी है और उसके वोट की प्रतिक्रिया में हिंदू वोट का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ जाता है। अभी 10 में से छह हिंदू भाजपा को वोट देता है। अगर 10 में से सात हिंदू भाजपा को वोट करे तो वह जीत जाएगी। इसके लिए दो तीन बातें जरूरी हैं। एक तो...

  • अपना काम नहीं कर सका चुनाव आयोग

    चुनाव आयोग की राजनीतिक बयानबाजी की खूब चर्चा हो रही है लेकिन इस बात के लिए आयोग को कोई जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा है कि उसने बिना सोचे समझे और बहुत खराब तरीके से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का जो काम किया उससे लाखों लोगों केनाम मतदाता सूची से बाहर छूट गए हैं और वे वोट नहीं डाल पाएंगे। लगभग 27 लाख ऐसे लोग इस बार वोट नहीं डाल पाएंगे, जिनके नाम की स्पेलिंग में गलती या जिनते पिता के नाम की स्पेलिंग गलत या किसी और किस्म की कथित तार्किक विसंगति है।...

  • तृणमूल और चुनाव आयोग आमने सामने

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा आमने सामने हैं लेकिन असली लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग में चल रही है। चुनाव आयोग ने बुधवार को वह किया, जो इससे पहले किसी संवैधानिक संस्था ने नहीं किया होगा। आयोग ने सीधे नाम लेकर तृणमूल कांग्रेस को चेतावनी दी। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद आयोग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ‘चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक, पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एंव सोर्स...

  • चुनाव आयोग की जवाबदेही

    सवाल यह नहीं है कि निर्वाचन प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है या नहीं। प्रश्न है कि इसको लेकर लोगों के मन में संशय क्यों है? शक भरे माहौल के कारण ही राजनीतिक गुटों के लिए लोगों को भड़काना आसान हो गया है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले माहौल अशांत और अराजक किस्म का है। लोगों के मन पर संदेह और आशंकाओं का साया है। इसकी ही मिसाल मालदा जिले में कलियाचक में देखने को मिली। वहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद तैयार मतदाता सूची पर आई आपत्तियों को निपटाने के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को...

  • चुनाव आयोग की सख्ती : ‘साइलेंस पीरियड’ में चुनावी प्रचार और एग्जिट पोल पर पूरी तरह रोक

    इस महीने से शुरू हो रहे विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को लेकर गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया और राजनीतिक दलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने साफ किया है कि मतदान से पहले निर्धारित 'साइलेंस पीरियड' के दौरान किसी भी तरह के चुनावी प्रचार या प्रभाव डालने वाली सामग्री के प्रसारण पर पूरी तरह रोक रहेगी।  15 मार्च को चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की 8 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। आयोग के मुताबिक, जन प्रतिनिधित्व...

  • चुनाव आयोग की गड़बड़ियां संयोग हैं या प्रयोग?

    चुनाव आयोग द्वारा अचानक कुछ ज्यादा ही ग़ड़बड़ियां होने लगी हैं। कहीं भाजपा की मुहर लगी चिट्ठी जारी हो जा रही है तो कहीं वेबसाइट में ऐसी गड़बड़ी दिखने लग रही है कि सांसदों के नाम ही मतदाता सूची से गायब हो जा रहे हैं। हर बार चुनाव आयोग कहता है कि तकनीती गड़बड़ी थी, जिसे ठीक कर लिया गया है या मानवीय भूल थी, जिस पर कार्रवाई कर दी गई है। लेकिन सवाल है कि इतनी गड़बड़ियां अचानक होने लगना संयोग है या प्रयोग? इससे पहले कभी इतनी गड़बड़ी नहीं हुई। यह भी सवाल है कि पश्चिम बंगाल में...

  • चुनाव आयोग को किस बात का डर है?

    चुनाव आयोग ने कमाल ही किया है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उसने जिन लोगों के नाम विचाराधीन श्रेणी में रखा है उनके दस्तावेजों की जांच करके पूरक मतदाता सूची जारी करने में उसे इतनी परेशानी हुई है कि सब हैरान हैं। चुनाव आयोग ने पहले तय किया था कि शनिवार, 21 मार्च को पहली पूरक मतदाता सूची जारी होगी। शाम तक इंतजार होता रहा और आयोग ने सूची जारी नहीं की। इसके बाद खबर आई कि सोमवार, 23 मार्च को पूरक मतदाता सूची जारी होगी। इस बार आयोग पर दबाव भी...

  • संविधान पवित्र या चुनाव की तारीख?

    अगर ‘विचाराधीन श्रेणी’ के सभी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती है तो क्या चुनाव कराना उचित होगा? ऐसे जिन विचाराधीन मतदाताओं के नाम पूरक मतदाता सूची में नहीं शामिल किए जाते हैं उनका पक्ष सुने बगैर क्या मतदान कराना उचित होगा? ये गंभीर सवाल हैं। इस बात का कोई अर्थ नहीं है कि किस पार्टी को इसका लाभ मिलता है और किसको हानि होती है। यह बहुत महत्वपूर्ण और गंभीर सवाल है कि किसी संवैधानिक व्यवस्था वाले देश में संविधान बड़ा होता है, उसके प्रावधान अहम होते हैं या एक निश्चित तारीख तक चुनाव कराने की मजबूरी...

  • चुनाव आयुक्तों वाले मामले से हटे चीफ जस्टिस

    नई दिल्ली। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनके होने से हितों का टकराव हो सकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि जब तक केंद्र सरकार कानून नहीं बना देती है तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक कमेटी करेगी. जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे। बाद में केंद्र सरकार ने 2023 में कानून बनाया तो नियुक्ति...

  • सोशल मीडिया पर भी प्री-सर्टिफिकेशन जरूरी

    आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब सभी राजनीतिक विज्ञापनों को जारी करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से प्री-सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।  चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं। आयोग के अनुसार कोई भी पंजीकृत राजनीतिक दल, संगठन, उम्मीदवार या...

  • चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पांच अधिकारियों का किया ट्रांसफर

    पश्चिम बंगाल विधानसभा के आम चुनाव 2026 की तैयारियों के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादलों और नई तैनाती को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश राज्य के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के माध्यम से दिए गए हैं।  आयोग द्वारा की गई समीक्षा के बाद पांच अधिकारियों की नई तैनाती तय की गई है। इसमें राठौड़ अमित कुमार भरत को डीआईजी रायगंज रेंज, अजीत सिंह यादव को डीआईजी मुर्शिदाबाद, श्रीहरि पांडे को डीआईजी बर्धमान, कंकर प्रसाद बरुई को डीआईजी प्रेसिडेंसी रेंज और अंजलि सिंह को डीआईजी जलपाईगुड़ी के रूप में तैनात किया गया...

  • चुनाव आयोग ने केरल के 5 अधिकारियों का किया ट्रांसफर

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विधानसभा चुनावों की घोषणा करते हुए आश्वासन दिया था कि केरल सहित सभी राज्यों में चुनाव प्रलोभन मुक्त, निष्पक्ष, तटस्थ और शांतिपूर्ण होंगे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने केरल में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस संबंध में आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।  चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, आईपीएस अधिकारी नारायणन (डीआईजी रैंक) को कोझिकोड में जिला पुलिस प्रमुख के पद पर तैनात किया गया है। थॉमसन जोस आईपीएस-2009...

  • राज्यों के चुनाव हैं सभ्यतागत संघर्ष नहीं

    चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव वैसे तो दोनों सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ साथ मजबूत प्रादेशिक क्षत्रपों और वामपंथी पार्टियों के लिए परीक्षा वाले हैं। लेकिन ये चुनाव खासतौर से भाजपा के लिए परीक्षा वाले इसलिए हैं क्योंकि इनके नतीजों से पता चलेगा कि भाजपा गैर कांग्रेस दलों और प्रादेशिक क्षत्रपों के मुकाबले अपनी चिरंतन कमजोरी से उबर पाई है या नहीं। यह भी पता चलेगा कि क्षेत्रीय और भाषायी अस्मिता वाले राज्यों में भाजपा की अखिल भारतीय राजनीति के दांव पेंच, व्यापक हिंदू ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद की राजनीति कारगर होती है या नहीं। ध्यान...

  • बंगाल में चुनाव आयोग का एक्शन: डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को हटाया

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने बड़ा फेरबदल किया है। आयोग ने पीयूष पांडे को हटाते हुए सिद्ध नाथ गुप्ता को पश्चिम बंगाल का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। इसके अलावा, सुप्रतिम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को कोलकाता का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आश्वासन दिया था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव हिंसा-मुक्त और शांतिपूर्ण होंगे। इसके अगले ही दिन पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जिनमें पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर भी...

  • स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की तैयारी

    नई दिल्ली। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आय़ुक्त ने दावा किया कि आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की पूरी तैयारी की है। उन्होंने साफ कहा कि एक भी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा और एक भी अपात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं रहेगा। इससे पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का मामला उलझता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त न्यायिक अधिकारी 60 लाख विचाराधीन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर रहा है। बहरहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने खिलाफ लाए गए...

  • चुनाव घोषणा पर नजर है लेकिन…..

    स्पष्ट अर्थ है कि जब तक इन सभी 52 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती है और उनमें से पात्र मतदाताओं के नाम पूरक मतदाता सूची में नहीं शामिल किया जाता है तब तक चुनाव नहीं होगा। तभी प्रश्न है कि क्या चुनाव से पहले इन सभी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच हो जाएगी? यह सवाल इसलिए है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की एक निर्धारित प्रक्रिया और तय समय सीमा होती है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयोग की फुल बेंच...

  • चुनाव आयोग के खिलाफ ममता का मोर्चा

    अब राहुल गांधी बैकग्राउंड में चले गए हैं। उनके साथ अक्सर ऐसा होता है। वे कोई मुद्दा उठाते हें और उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। वे अब वोट की लूट और चुनाव आयोग की कथित गड़बड़ियों का मुद्दा नहीं उठा रहे हैं। लेकिन ममता बनर्जी ऐसा नहीं करती हैं। वे कोई मुद्दा उठाती हैं तो जब तक उसको किसी नतीजे पर नहीं पहुंचाती हैं या उससे अपना राजनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं कर लेती हैं तब तक उसे छोड़ती नहीं हैं। अभी उनके निशाने पर चुनाव आयोग है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर शुरू होने के...

  • दिल्ली: चुनाव आयोग का राउंड टेबल सम्मेलन शुरू

    भारत मंडपम में मंगलवार को चुनाव आयोग और देशभर के राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन शुरू हुआ। खास बात यह है कि इस तरह की बैठक 27 वर्षों बाद आयोजित की गई है। इससे पहले ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में हुआ था। सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कर रहे हैं। इस अवसर पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद रहे। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ ही 36 राज्यों...

  • ममता ने चुनाव आयोग को एक और चिट्ठी लिखी

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक और चिट्ठी लिखी है। यह उनकी चौथी चिट्ठी है। ममता ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान 77 लोगों की मौत हुई है। दो पन्नों की इस चिट्ठी में उन्होंने एसआईआर के नाम पर आम नागरिकों को लगातार परेशान जाने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने चिट्ठी में लिखा, टएसआईआर की प्रक्रिया में मानवीय संवेदनशीलता नहीं दिखी। 77 लोगों की मौत, चार आत्महत्या के प्रयास और 17 लोगों के बीमार होने की वजह एसआईआर प्रक्रिया रही। लोगों...

  • विपक्षी पार्टियों ने आयोग पर निशाना साधा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के पहले चरण के बाद जारी हुई मसौदा मतदाता सूची को लेकर विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम कट गए हैं। इसे लेकर उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘इससे पहले कि मतदाताओं का रोष आक्रोश बनकर आंदोलन का रूप ले ले, चुनाव आयोग मैनपुरी में एसआईआर से कटे वैध नामों के लिए संज्ञान लेकर मतदाता सूची दुरुस्त कराए’। कांग्रेस पार्टी...

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