आदेश और अंतरात्मा के बीच खड़ी वर्दी !
सुधार किसी एक प्रदर्शन की जीत-हार से नहीं निकलेगा। बल प्रयोग की हर घटना की वीडियो, समय और आदेश-श्रृंखला सार्वजनिक होनी चाहिए। निषेधाज्ञा लिखित हो और बाद में आनुपातिकता की स्वतंत्र जाँच हो। चिह्नित स्थलों पर पूर्व सूचना और यातायात व्यवस्था को अनुमति के पूर्ण निषेध से अलग रखा जाए। प्रदर्शनकारियों के लिए भी सीमा साफ है। लोकतंत्र केवल मतपेटी में बंद मतों का नाम नहीं है। वह उस सांस का भी नाम है, जिसमें नागरिक अपनी नाराजगी शांतिपूर्वक सड़क पर रख सके। भारत के संविधान ने यह सांस अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) में दी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और...