Election Commission

  • चुनाव आयोग के काम भी तो ऐसे हैं!

    जब से ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने चुनाव आयोग के अंदर की खींचतान और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों की खबर छापी है तब से एक बड़ी जमात ऐसी है, जिसको संवैधानिक संस्था की साख की चिंता सताने लगी है। लेकिन सवाल है कि क्या किसी अखबार ने या किसी विपक्षी राजनीतिक दल ने चुनाव आयोग या किसी अन्य संवैधानिक संस्था की साख खराब की है? चुनाव आयोग ने अपनी साख तो खुद ही खराब की है। उसके काम ऐसे हैं, जिनसे उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। यह सिर्फ एसआईआर का मामला नहीं है। चाहे आचार संहिता के...

  • Gen-Z के वोट पर ECINet की लटकी रहेगी तलवार!

    सन् 2029 के लोकसभा चुनाव तक भारत की जनरेशन-जेड यानी 35 वर्ष से कम उम्र की नौजवान पीढ़ी पर तलवार तय है। हां, हर घर-परिवार में 18–19, 20–24, 25–29 और 35 वर्ष से कम उम्र की नौजवान पीढ़ियों के असंख्य यूथ बिना वोट अधिकार के हो सकते हैं। कैसे, क्यों? इन लड़के-लड़कियों को न केवल Form-6 के बेहूदा, अनावश्यक सवालों के जवाब देने होंगे, बल्कि एसडीएम दफ्तरों, कैंपों, कर्मचारियों को बार-बार जवाब देना होगा। फॉर्म और चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर की कसौटियों में इन्हें मताधिकार के लिए लड़ना होगा। कर्मचारियों से बहस करनी होगी। नहीं तो चुनाव के समय घर...

  • विपक्ष की राजनीतिक दिशा ही ठीक नहीं है

    वास्तविकता यह है कि न तो देश में कोई प्रत्यक्ष सत्ता विरोधी लहर है और न विपक्ष भाजपा के साथ जमीनी चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है। इस दावे का परीक्षण कई स्तरों पर किया जा सकता है। पहले अगर विपक्ष की तैयारियों की बात करें तो यह दिख रहा है कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां जनता के बीच यह माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं जैसे चुनाव आयोग ही भाजपा को चुनाव जिता रहा हो। यह बात सचाई से कोसों दूर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लग रहा है कि उनका समय आ गया है। ऐसा...

  • चुनाव आयुक्तों ने दी सफाई

    नई दिल्ली। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट से शुरू हुए विवाद को समाप्त करने के लिए शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ बैठक की और सभी मुद्दों पर सफाई दी। एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर पूर्ण आयोग की बैठक हुई, जिसके बाद सभी मुद्दों पर सफाई दी गई। आयोग की ओर से कहा गया कि अखबार की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से असहमति जताने का जिक्र किया गया है वह एसआईआर को लेकर नहीं है। यह भी कहा गया कि एसआईआर आम सहमति से लिया गया फैसला था। मुख्य चुनाव...

  • एसआईआर में गलती तो चुनाव कैसे सही?

    अब साफ है कि मुख्य चुनाव आयुत ज्ञानेश कुमार के कार्यालय से सब कुछ संचालित हो रहा था। पूरे देश के मतदाताओं की कुंजी दिल्ली में उनके कार्यालय में थी। सब कुछ इतना सेंट्रलाइज्ड था कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को भी भनक नहीं थी। ऐसा लग रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यालय चुनिंदा लोगों के नाम काटने के लिए कृत संकल्प था। तभी दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस पर हैरानी जताई है कि पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों से मंजूरी के बाद जो नाम जोड़े गए उनके खिलाफ अपील का फैसला किसने किया? ऐसे अनेक सवाल ‘द इंडियन...

  • बेंच के बाद बेंच!

    केंद्र ने विधेयक के जरिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा, तो उसके बाद लगभग तीन साल गुजर चुके हैं। अब नई बेंच बनेगी, तो जैसा तजुर्बा है, उसका फैसला आने में अभी कई और वर्ष गुजरेंगे। मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय की। पांच जजों की संविधान पीठ ने व्यवस्था दी कि ये नियुक्तियां तीन सदस्यीय समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश, एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल रहेंगे। नरेंद्र मोदी सरकार को यह निर्णय पसंद नहीं आया, तो उसने उसी वर्ष दिसंबर में संसद से विधेयक पारित करवा कर...

  • ज्ञानेश की तानाशाही किसके कहने पर?

    भारत का चुनाव आयोग कई बरसों से कई कारणों से निशाने पर है। पिछले साल जून में जब बिहार में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का अभियान शुरू किया तब से लेकर अब तक वह एसआईआर में मनमाने तरीके से नाम काटने, नए नाम जोड़ने, नाम हटाने के फैसले की समीक्षा करने जैसे कई मामलों को लेकर ज्यादा निशाने पर है। अब अंग्रेजी के अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें चुनाव आयोग में चल रही कई तरह की गड़बड़ियों और मनमानियों का खुलासा किया है। बुधवार, 23 सितंबर को...

  • युवा मतदाताओं को प्रताडित करने के बदलाव?

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों की जो शिकायत दोनों चुनाव आयुक्तों एसएस संधु और विवेक जोशी ने की है उसमें एक बड़ी शिकायत पहली बार के यानी युवा मतदाताओं को लेकर है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने पहली बार नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह के प्रारूप में किए गए बदलाव पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि फॉर्म छह के प्रारूप में जो बदलाव किया गया है वह मनमाना है और गैरकानूनी भी है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी शिकायत में लिखा है कि यह बदलाव युवाओं को परेशान और प्रताड़ित करने वाला है।...

  • ज्ञानेश की मनमर्जी में है चुनाव आयोग

    नई दिल्ली। मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम काटने और जोड़ने के आरोपों से घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने बुधवार, 23 सितंबर को एक खोजी रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को बिना बताए आयोग कई बड़े फैसले हुए। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने पिछले 10 महीने में 14 बार इसकी शिकायत की है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों आयुक्तों ने देश के...

  • आयोग ने आरोपों पर सफाई दी

    नई दिल्ली। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बुधवार की सुबह से ही ज्ञानेश कुमार के ऊपर चौतरफा हमले शुरू हो गए। इसके साथ ही सफाइयों का सिलसिला भी शुरू हुआ। पहले सूत्रों के हवाले से मीडिया को खबर दी गई कि चुनाव आयोग में सब कुछ ठीक है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों की साझा सहमति से किया गया था। बाद में भारतीय जनता पार्टी भी चुनाव आयोग के समर्थन में उतरी। भाजपा के सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग...

  • चुनाव आयोग को स्वतंत्र दिखना भी चाहिए

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने तरीके से काम करने और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों की अनदेखी करने को लेकर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में हुए खुलासे के बीच बुधवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के मामले में एक अहम फैसला आया। हालांकि फैसला बंटा हुआ है लेकिन उससे पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता ने जो कहा वह बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सिर्फ स्वतंत्र होना ही नहीं चाहिए, बल्कि स्वतंत्र दिखना भी चाहिए। उन्होंने आयुक्तों की नियुक्ति के पैनल पर भी सवाल उठाया। असल में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की...

  • चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को चुनाव: निर्वाचन आयोग

    निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को कहा कि आगामी 23 अक्टूबर को चार राज्यों में विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 28 सीटों के लिए चुनाव होंगे। इन 28 सदस्यों का कार्यकाल नवंबर और दिसंबर में समाप्त हो रहा है। ये सीटें बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश विधान परिषद की हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र विशेष चुनावी क्षेत्र होते हैं, जहां केवल निर्धारित योग्यता रखने वाले स्नातक और शिक्षक ही विधान परिषद के सदस्यों (एमएलसी) का चुनाव करते हैं। Also Read : राज्यसभा की 12 सीटों पर चुनाव की घोषणा संविधान का अनुच्छेद 171 विधान परिषदों (विधान परिषद)...

  • बेतुकेपन से हटा परदा

    एसआईआर शुरू होने के पहले निर्वाचन आयुक्त ही अपने कागजात ठीक नहीं करवा पाए, तो आम नागरिक से ऐसी अपेक्षा का क्या तर्क हो सकता है? बहरहाल, बात सिर्फ एस.एस. संधू की नहीं है। तमाम आपत्तियों और विपक्ष के सवालों को ताक पर कर जो निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करवा रहा है, उसके ही आयुक्त (एस.एस. संधू) को विसंगति का नोटिस मिलना जाहिर कर देता है कि इस पूरी प्रक्रिया की योजना कितने बेतुके ढंग से बनाई गई। एसआईआर शुरू होने के पहले निर्वाचन आयुक्त अपने कागजात ठीक नहीं करवा पाए, तो आम नागरिक से...

  • दलबदल में चुनाव आयोग की मनमानी!

    ऐसा लग रहा है कि दलबदल के मामले में चुनाव आयोग को किसी नियम का पालन करने की जरुरत नहीं महसूस होती है। वह अपनी या सत्तारूढ़ दल की सुविधा के हिसाब से नियमों को लागू करती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो लोक जनशक्ति पार्टी से लेकर शिव सेना और एनसीपी से होते हुए तृणमूल कांग्रेस तक के ऊपर अलग अलग नियम नहीं लागू किए जाते है। ताजा मामला तृणमूल कांग्रेस में हुई दलबदल का है। चार मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के थोड़े दिन के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टूट गई। उनके करीब 60...

  • तृणमूल के दोनों गुट चुनाव आयोग से मिले

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह को लेकर दूसरी बार तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट चुनाव आयोग से मिले हैं। बताया जा रहा है कि आयोग जल्दी ही इस मामले में अंतरिम आदेश जारी कर सकता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम सीट पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होने वाला है। इसमें ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों गुटों ने एक ही चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार उतारे हैं। चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। दोपहर बाद तीन...

  • चुनाव आयोग से मिले टीएमसी के दोनों गुट के नेता

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों रेजीनगर और नंदीग्राम पर उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव में नामांकन की अवधि समाप्त होने से पहले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह का विवाद सुलझाने के लिए चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों खेमों के नेताओं को बुलाया था। ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी दोनों गुट के नेताओं ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। शनिवार को पहले ऋतब्रत बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के सामने मौखिक दलीलें दीं और सवालों के जवाब दिए। आयोग ने उनसे दिन खत्म होने से पहले अतिरिक्त दस्तावेज जमा...

  • चुनाव आयोग ने त्रिपुरा में एसआईआर किया स्थगित

    त्रिपुरा में राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत ग्राम समितियों के आगामी आम चुनावों के कारण लिया गया है। एसआईआर को स्थगित करने के आयोग के निर्णय से कल त्रिपुरा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराया गया, जिसके बाद राज्य निर्वाचन तंत्र ने ग्राम समिति चुनावों के साथ टकराव से बचने के लिए एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने का अनुरोध किया था। यह निर्णय इसलिए अहम है क्योंकि आने वाले ग्राम समिति चुनावों में, खासकर एडीसी इलाकों में, प्रशासन...

  • चुनाव आयोग को अपनी छवि की चिंता

    चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जब भी सवाल उठता है और विपक्षी पार्टियां उस पर पक्षपात के आरोप लगाती हैं तो चाहे पिछले मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार रहे हों या मौजूदा ज्ञानेश कुमार हों, उनका रवैया परवाह नहीं करने वाला होता है। वे विपक्ष की आलोचनाओं को हवा में उड़ाते चलते हैं। लेकिन अब लग रहा है कि चुनाव आयोग भी अपनी छवि की चिंता हो रही है। उसको लग रहा है कि इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और वीवीपैट को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं उससे लोगों के मन में आशंका हो रही है। तभी जनभावना...

  • संदेह से वाकिफ़ आयोग

    तो सवाल उठेगा कि निर्वाचन आयोग ने आम जन और विपक्ष के मन से संदेह दूर करने का क्या प्रयास किया है? जब कभी ऐसे सवाल उठे, आयोग ने उनके प्रति लापरवाह रुख क्यों अपनाया? कम-से-कम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मामले में निर्वाचन आयोग इससे अवगत है कि इनको लेकर आम लोगों के मन में कई सवाल हैं। यह बात खुद आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कही है। मुद्दा ईवीएम वोटों की गिनती में ‘टोटलाइजर’ के इस्तेमाल का है। एक जन हित याचिका में इसके उपयोग का निर्देश देने की गुजारिश की गई है। टोटलाइजर मशीन पोलिंग बूथों की...

  • चुनाव आयोग ने एसआईआर ड्राफ्ट जारी किया

    चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बाद महाराष्ट्र में 2,07,93,916 और नयी दिल्ली में 47,56,722 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची के ड्राफ़्ट से हटा दिये हैं। घर-घर जाकर बड़े पैमाने पर किए गए सत्यापन एवं डिजिटलीकरण प्रक्रिया से पता चला है कि महाराष्ट्र में पंजीकृत लगभग 9.78 करोड़ मतदाताओं में से केवल 7.69 करोड़ रिकॉर्ड ही सफलतापूर्वक सत्यापित एवं डिजिटलीकृत किये जा सके हैं। इसी प्रकार राष्ट्रीय राजधानी में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया, जहां कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से केवल 97,53,507 लोगों के नाम ही अंतिम ड्राफ़्ट में शामिल हो पाये जिससे दिल्ली के लगभग...

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