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कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट

अपन तो कहेंगे
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कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट
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नमस्कार मैं हूं हरिशंकर व्यास..लेफ्ट कहें, वामपंथ कहें या कम्युनिस्ट भी इनका अपना सियासी वजूद भारत में भले ही संघर्ष करता रहा है..यानी ये कभी भी देश की सत्ता में पूरी तरह तो नहीं रहे लेकिन इसमें भी कोई शक  नहीं कि इनकी सोच, भाषा और शब्दावली ने समाज से लेकर सियासत तक पर जबरदस्त असर छोड़ा है…तभी हाल के कुछ दशकों में सरकारें किसी की भी रही हो खासकर कांग्रेस की तो वो इनकी सोच से खुद को अलग ही नहीं कर पा रही है और इन्हीं की आड़ में संघ और मोदी-योगी  ने वो कर दिखाया जिसने कांग्रेस की मौजूदा राजनीति का कबाड़ा कर दिया…इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे के विशेष एडिशन में जो चार एपिसोड का होगा उसमें पहले में मेरे विचार का शीषर्क है…कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट!

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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