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इस्लाम का भय-भारत में सच और झूठ

अपन तो कहेंगे
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इस्लाम का भय-भारत में सच और झूठ
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नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या यूरोप के तमाम देश वाकई इस्लामिक कट्टरपंथ का सामना कर रहे हैं या फिर ये उनके जेहन में बैठा एक डर भर है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि आखिर 6 से 10 फीसदी मुस्लिम आबादी कैसे कई यूरोपीय देशों के लिए खतरा बन सकती है..तभी ‘द इकोनॉमिस्ट’ पत्रिका के कवर पेज पर छपे यूरोप में इस्लाम के बारे में सच और झूठ के शीर्षक को लेकर हंगामा मच गया..जैसा कि इसी शीर्षक को अगर भारत के संदर्भ में देखे तो फिर  कुछ ऐसा ही डर या कहें तो डराने का तंत्र भारत में भी नजर आता है..इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है..

इस्लाम का भय-भारत में सच और झूठ

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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