मेडिकल में दाखिले की नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा अभी थमी नहीं है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का एक और कारनामा सामने आ गया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए एक और परीक्षा में फेल हो गया है। इसमें यूजीसी नेट की परीक्षा कराई थी, जिसके तीन पेपर रद्द करने पड़े हैं क्योंकि उन तीनों पेपर्स में दर्जनों गलतियां मिली हैं। अब ये तीनों पेपर अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी छात्रों को दोबारा देने होंगे। सोचें, केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय एजेंसी बनाई है, जिसका काम ही साफ सुथरे ढंग से परीक्षा का आयोजन कराना है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि हर दूसरी परीक्षा में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी हो जा रही है। कहीं परीक्षा केंद्र मैनेज हो जा रहा है तो कहीं पेपर लीक हो जा रहा है और अगर कोई बाहरी ताकत यह सब गड़बड़ी नहीं कर रही है तो एनटीए के विशेषज्ञ प्रश्न पत्र सेट करने में फेल हो जा रहे हैं।
यूजीसी नेट का मामला प्रश्न पत्र तैयार करने में विफलता का है। तीन पेपर्स में तथ्यात्मक गलतियां हैं, टाइपिंग की गलतियां हैं, आउट ऑफ द सिलेबस सवाल हैं और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि छात्रों का दावा है कि अंग्रेजी के पेपर में डेढ़ सौ में से 67 सवाल ऐसे हैं, जो 2024 में भी पूछे गए थे। यानी दो साल बाद पुराने सवाल उठा कर प्रश्न पत्र में ऱख दिए गए। सवालों के लिए दिए गए विकल्प में लोगों के नाम गलत लिखे गए हैं, उपनाम भी गलत हैं और जगहों के नाम भी गलत लिखे गए हैं। ऐसा लग रहा है, जैसे बिना तैयारी के कामचलाऊ ढंग से सवाल रख दिए गए। छात्रों ने जब इन गलतियों की शिकायत की तो परीक्षा रद्द करके सितंबर में परीक्षा की नई तारीख जारी की गई। इससे नतीजे आने में देरी होगी और आगे की सारी प्रक्रिया में देरी होती जाएगी। दो साल पहले 2024 में जब नीट यूजी के पेपर लीक हुए थे तब राधाकृष्णन आयोग का गठन हुआ था, जिसने एनटीए में सुधार के कई सुझाव दिए थे। इस साल भी नीट यूजी पेपर लीक के बाद संरचनागत सुधारों की जरुरत बताई गई। लेकिन लग नहीं रहा है कि सरकार को किसी तरह के सुधार की जल्दी है।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



