Assam assembly election

  • असम में भाजपा ने बड़ी ताकत लगाई है

    असम में क्या भाजपा को किसी तरह की चिंता दिख रही है? कायदे से तो नहीं दिखना चाहिए क्योंकि परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 39 से घट कर 22 रह गई है। इन 22 सीटों में भी कांग्रेस के साथ बदरूद्दीन अजमल की पार्टी की घमासान लड़ाई है। असदुद्दीन ओवैसी भी अजमल की पार्टी की मदद के लिए पहुंच गए हैं। राज्य की बाकी 104 सीटों में भाजपा के लिए जीत आसान मानी जाती है। इसके बावजूद भाजपा जितनी मेहनत कर रही है और जिस तरह के एजेंडे उठाए जा रहे हैं उनसे लग रहा है कि...

  • असम में कांग्रेस ने भाजपा को दिया झटका

    असम में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से कांग्रेस को झटका दिया जा रहा था। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा को भाजपा ने तोड़ लिया था और नामांकन शुरू होने के बाद उसने कांग्रेस के सांसद प्रद्योत बोरदोलोई को तोड़ लिया। भाजपा ने दोनों को विधानसभा की टिकट भी दी है। लेकिन कांग्रेस ने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त होने के दिन हिमंत बिस्वा सरमा को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस ने उनकी सरकार की एक मंत्री को तोड़ लिया है और अपनी पार्टी की टिकट से मैदान में उतारा है। आदिवासी समाज की नेता...

  • असम चुनाव: कांग्रेस ने 30 नामों पर लगाई मुहर

    आगामी असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 42 में से 30 उम्मीदवारों के नामों की सूची को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी कि लोकसभा में विपक्ष के उपनेता और असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई को जोरहाट विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है।   सूत्रों ने बताया कि असम की 42 सीटों पर कांग्रेस ने मंथन किया है, जिनमें से लगभग 30 नामों पर मुहर लग गई है और गौरव गोगोई के जोरहाट से चुनाव लड़ने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरे सांसद रकीबुल हसन...

  • प्रियंका ने अपने लोगों को असम में लगाया

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को वैसे तो असम में सिर्फ टिकट बंटवारे के काम में लगाया गया है। लेकिन वे चुनाव की रणनीति बनाती भी दिख रही हैं। कम से कम टिकट बंटवारे के लिए या संभावित उम्मीदवारों की छंटनी के लिए ही उन्होंने जो तरीका निकाला है उससे कांग्रेस का चुनावी माहौल बन रहा है। ध्यान रहे प्रियंका को असम के लिए छंटनी समिति का प्रमुख बनाया गया है। आमतौर पर नेहरू-गांधी परिवार के किसी सदस्य को इतनी छोटी जिम्मेदारी नहीं मिलती है। उनको कहीं भी जाकर किसी भी तरह की राजनीति करने की छूट होती है और...