पूंजीवाद के सामने औचित्य का संकट
सोवियत खेमा ढहने के बाद से अब तक जितना धन उत्पन्न हुआ, उतना इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। पर यह धन बहुत ही सीमित लोगों के पास इकट्ठा हो गया है।...ऐसे में उत्पन्न धन के लाभ से वंचित समुदायों में पूंजीवाद के प्रति असंतोष बढ़ना लाजिमी है। फिलहाल, नफरत के एजेंडे में लोगों को उलझा कर शासक वर्ग विकल्प की चर्चा को मुख्यधारा से दूर रखे हुए हैं। लेकिन ऐसा करना अनिश्चित काल तक संभव नहीं होगा। तभी इस बार दावोस में जुटी हस्तियों के चेहरे से हंसी-खुशी गायब रही। दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक...