‘चांद मेरा दिल’: प्रेम की बदलती भाषा
‘चांद मेरा दिल’ कोई कालजयी प्रेमकथा नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह खोखली भी नहीं है। यह सुंदर है, ईमानदार है, संवेदनशील है, और कई क्षणों में प्रभावशाली भी। यह चांद तक पहुंचने वाली फ़िल्म नहीं, लेकिन उसकी रोशनी में बैठकर कुछ देर अपने पुराने प्रेम, अपनी असुरक्षाओं और अपने अधूरे संवादों को याद करने वाली फ़िल्म अवश्य है। आज के सिने-सोहबत में ताज़ा तरीन फ़िल्म 'चांद मेरा दिल' की बात करते हैं। हिंदी सिनेमा में प्रेमकथाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही हैं; वे समय के सामाजिक और सांस्कृतिक मानस का दर्पण भी रही हैं। हर दौर ने प्रेम...