आठ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की ओर से उच्च अदालतों में नियुक्ति के लिए भेजी गई 68 नामों की सूची पर अभी तक सरकार ने फैसला नहीं किया है लेकिन उससे पहले ही कॉलेजियम ने एक और रिकार्ड सिफारिश की है।

सांप्रदायिक व फर्जी खबरें रोकने की चुनौती!

सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी पिछले साल दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में हुए तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के मामले में की।

जो सच बोलेंगे, सच्चे होंगे, वे मारे जाएंगे!

देश के चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का आभार जो उन्होंने सरकारों और लोकतंत्र का आधार मानी जाने वाली संस्थाओं की हकीकत जाहिर की।

न्यायाधीशों की नियुक्तियों की खबरों से खफा मुख्य न्यायाधीश, मीडिया को दी चेतावनी

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आज कहा कि वह नए न्यायाधीशों पर सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की सिफारिशों पर मीडिया रिपोर्टों से बेहद परेशान हैं और उन्होंने मीडिया से ऐसी खबरों की रिपोर्टिंग में जिम्

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार कोई महिला बनेगी चीफ जस्टिस

इसके अलावा, वह महिलाओं के लिए समानता और न्याय के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की पहल, द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ विमेन जज (IAWJ) की भी सदस्य हैं।

जस्टिस ने जो नहीं कहा

जस्टिस रमना ने जो नहीं कहा, वह यह है कि अब पुलिस ज्यादतियों को एक सरकारी नीति के रूप में अपना लिया गया है। ‘ठोक दो’ के औपचारिक आदेश ने पुलिस को बंधन मुक्त कर दिया है।

मैं मां बनना चाहती हूं, मेरे पति को बेल दे दीजिए… नाबालिग के साथ रेप करने की सजा काट रहा है आरोपी पति… कोर्ट भी असमंजस में

फिलहाल चीफ जस्टिस ने इस मामले में इस संबंध में जानकारी जुटाने का आदेश दिया है. कोर्ट की ओर से कहा गया है कि कि क्या ऐसा संभव है ? दूसरे देशों में इस तरह के मामले में कैसे निर्णय लिए जाते हैं इस बात की जानकारी जुटाई जाए.

तीखी टिप्पणियों से क्या होता है?

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने के लिए चुनाव आयोग पर मुकदमा चलना चाहिए। अदालत ने यहां तक कहा कि आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। सवाल है कि फिर अदालत ने मुकदमा चलाने की पहल क्यों नहीं की? जब हाई कोर्ट को लग रहा है, जैसा कि चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी में कहा कि चुनाव आयोग कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के लिए जिम्मेदार है और उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए तो उसे मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी देना चाहिए था। तभी नजीर कायम होती। चुनाव बीत जाने के बाद इस तरह की टिप्पणियों का कोई खास मतलब नहीं रह जाता है। मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस इतने नाराज थे कि उन्होंने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए यहां तक कहा कि जब रैलियां हो रही थीं और कोरोना फैल रहा था तब क्या आयोग के अधिकार दूसरे ग्रह पर थे। यह बहुत तीखी टिप्पणी है लेकिन अगर यह बात आदेश में नहीं लिखी गई है तो उसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि इस देश की सारी संस्थाओं के अधिकारियों की खाल मोटी हो गई है और वे अदालतों की ऐसी टिप्पणियों की परवाह नहीं… Continue reading तीखी टिप्पणियों से क्या होता है?

जस्टिस NV Ramana ने ली मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ, 16 महीने तक संभालेंगे पद भार

जस्टिस रमना अपने कई फैसलों के चलते देष में काफी चर्चित रहे. जिनमें जस्टिस रमना की अध्यक्षता वाली 5 जजों..

सुप्रीम कोर्ट में नहीं होगी गर्मी की छुट्टी

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गर्मी की छुट्टी रद्द कर दी है और 19 जून तक काम जारी रखने का फैसला किया है। इसकी घोषणा आज की गई।

केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आइसोलेशन में गए

केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. मणि कुमार वर्तमान में यहां अपने सरकारी आवास पर दो सप्ताह के लिए आइसोलेशन में हैं।

लैंगिक समानता के लिए उपाय करना जरूरी : सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश् (सीजेआई) शरद अरविंद बोबडे ने आज कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक मूल्यों की संरक्षक है और कानून के शासन की प्रतिबद्धता के साथ जनवादी ताकतों की सेवा करती है।

‘टाटा, वाडिया को मानहानि मामला सुलझाने को बात करनी चाहिए’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नुस्ली वाडिया और रतन टाटा को मानहानि मामले में अपने मुद्दों को सुलझाने के लिए आपास में बात करनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश एस.ए.बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोर्ट को इन आरोपों के पीछे की वजह की जानकारी नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, आप दोनों को बात करनी चाहिए। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि यह सुझाव एक विचार है, इस मामले में कानून नहीं है। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी.आर.गवई और सूर्यकांत भी शामिल हैं। वाडिया ने आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू की है। वाडिया ने ऐसा साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद टाटा कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के पद से खुद को हटाने जाने के बाद किया। टाटा ने लगातार कहा है कि बदनाम करने का कोई इरादा नहीं था। वरिष्ठ वकील सी.ए. सुंदरम ने कोर्ट से कहा कि अगर विपक्षी पार्टी अपने आरोपों को वापस लेती है तो उनके मुवक्किल मामले को वापस लेने के लिए तैयार हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट बंबई हाई कोर्ट के निष्कर्षो को मंजूरी दे सकती है कि टाटा का वाडिया को बदनाम करने का कोई इरादा नहीं था। यह खबर भी पढ़ें:-… Continue reading ‘टाटा, वाडिया को मानहानि मामला सुलझाने को बात करनी चाहिए’

अयोध्या पर याचिकाएं खारिज

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मामले में पिछले महीने आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 18 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन सबको खारिज कर दिया। हालांकि अब भी इस मामले से जुड़े पक्षों के पास सुधारात्मक याचिका दायर करने का मौका है। बहरहाल, गुरुवार को इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों के पीठ ने कहा कि याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है। अदालत ने कहा कि नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद मामले में नौ नवंबर को अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने विवादित जमीन रामलला को यानी राम मंदिर बनाने के लिए देने का फैसला किया था। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की विशेष पीठ के नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुल 18 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें नौ याचिकाएं पक्षकारों की ओर से और बाकी नौ अन्य याचिकाकर्ताओं की थीं। चूंकि ये रिप्रेजेंटेटिव सूट यानी प्रतिनिधियों के जरिए लड़ा जाने वाला मुकदमा था, लिहाजा सिविल… Continue reading अयोध्या पर याचिकाएं खारिज

न्यायमूर्ति गुलजार अहमद पाक के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

इस्लामाबाद। न्यायमूर्ति गुलजार अहमद पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश होंगे। कानून मंत्रालय की बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि न्यायमूर्ति गुलजार अहमद को देश का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति गुलजार की नियुक्ति न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा के स्थान पर की गई है। नए न्यायमूर्ति वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद 21 दिसंबर को कार्यभार संभालेंगे। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति अहमद का जनम दो फरवरी 1957 को कराची के जाने माने वकील नूर मुहम्मद यहां हुआ। नए न्यायमूर्ति की प्रारंभिक शिक्षा शहर के गुलिस्तां स्कूल में हुई। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार न्यायमूर्ति अहमद ने कराची के गवर्नमेंट नेशनल कालेज से कला में स्नातक किया और इसके बाद शहर के ही एस एम ला कालेज से कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने अधिवक्ता के रूप में अपना जीवन 18 जनवरी 1986 को शुरू किया और चार अप्रैल से हाई कोर्ट में काम शुरू किया।

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