नई शिक्षा नीति : एक विश्लेषण

यह शिक्षा नीति पर आजादी के बाद का चौथा प्रस्ताव है। शिक्षा नीति का पहला दस्तावेज़ 1968 में डी.एस. कोठारी के द्वारा पेश किया गया था जिसे आम बोल चाल में लोग कोठारी कमीशन बोलते है।

शिक्षा नीति के अनुत्तरित प्रश्न

खबर है कि सर्वोच्च भाजपा नेता स्वयं शिक्षा नीति को परखेंगे। क्या इस में ‘नीति’ भी परखी जाएगी? यह प्रश्न इसलिए, क्योंकि पाँच महीने पहले देश और सभी राज्यों के सर्वोपरि शिक्षा अधिकारियों एवं तत्विषयक जिम्मेदार नेताओं का सम्मेलन हुआ था। उस में अनेक कुलपति, विविध शैक्षिक संस्थानों के प्रमुख, तथा आमंत्रित विद्वान भी थे। सैकड़ों जिम्मेदार लोगों का यह सम्मेलन शिक्षा नीति पर ही केंद्रित था। उस में विमर्श के लिए जो दस्तावेज सब को दिया गया था, उस की सभी वक्ताओं ने प्रशंसा की। सम्मेलन का संचालन एक सर्वोच्च शिक्षा अधिकारी कर रहे थे। जब कार्यक्रम समाप्ति पर आया, तो उन्होंने औपचारिक रूप से पूछ लिया कि क्या और किसी को कुछ कहना है? तब देश के जाने-माने विद्वान, जेएनयू के पूर्व-रेक्टर, प्रो. कपिल कपूर ने हाथ उठाया। जब उन्हें अपनी बात कहने की अनुमति मिली, तो उन्होंने केवल एक प्रश्न पूछा: ‘‘सभा में उपस्थित गणमाण्य जनों से मैं एक बात जानना चाहता हूँ, कि इस मोटे दस्तावेज में शिक्षा-नीति कहाँ पर लिखी है?’’ उपस्थित तमाम लोग झेंप गए। किसी को उत्तर न सूझा। तब प्रो. कपूर ने संक्षेप में दो-चार बातें रखीं। वही विचारणीय है। प्रथम, नीति का अर्थ होता है, ‘कुछ निश्चित सिद्धांतों पर बनी कोई… Continue reading शिक्षा नीति के अनुत्तरित प्रश्न

नई शिक्षा नीति में 12वीं कक्षा तक शिक्षा का अधिकार

भारत की शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने की तैयारी मानव संसाधन मंत्रालय ने शुरू कर दी है। भारत सरकार 2020 के शैक्षिण सत्र में ही देश को नई शिक्षा नीति देना चाहती है।

विदेशों से फालतू चीजें क्यों मंगाएं?

आज यह खबर पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई कि भारत सरकार कई तरह के विदेशी माल मंगाना बंद करनेवाली है। अकेले चीन से आनेवाली 371 चीज़ों पर रोक लगानेवाली है। इन चीज़ों में बच्चों के खिलौने, दवाइयां, बिजली का सामान, तार, टेलीफोन, फर्नीचर, कुछ खाने-पीने की चीजें आदि हैं। इन चीजों में से एक भी चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके भारत में नहीं आने से भारतीयों का कोई बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा या उन्हें जान-माल की हानि हो जाएगी। ये सब चीजें ‘अनावश्यक’ चीजों की श्रेणी में आती हैं। आप जानते हैं कि ये गैर-जरुरी चीजें कितने की आती हैं? कम से कम 4 लाख करोड़ रु. की याने अरबों-खरबों रु. की। ऐसी चीजें हम अमेरिका और अन्य देशों से भी मंगाते हैं। हमारे देश की पसीने की कमाई के खरबों रु. विदेशों में बह जाते हैं। यदि इनका आयात बंद हो जाए तो यह बचा हुआ रुपया देश के खेतों और कारखानों की बेहतरी में लगाया जा सकता है। मैं तो कहता हूं कि सभी देशों से आनेवाले अय्याशी के सामानों पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती? मुट्ठीभर लोग, जो अरबों रु. इन चीजों पर बहाते हैं, वे कौन हैं? वे लोग भारतीय नहीं हैं, वे इंडियन हैं।… Continue reading विदेशों से फालतू चीजें क्यों मंगाएं?

न्यू इंडिया के विजन में युवाओं की प्रमुख भूमिका : पोखरियाल

शिमला। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने शुक्रवार को कहा कि युवाओं को न्यू इंडिया के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा कि और केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति ला रही है। उन्होंने यहां हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। कुल 448 डिग्री व गोल्ड मेडल प्रदान किए गए, जिसमें से 276 महिलाओं को दिए गए। विवेक कुमार को डी.लिट की डिग्री प्रदान की गई, जबकि अफगानिस्तान के मोहम्मद शरीफ शाहीन को लोक प्रशासन ने गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपने ज्ञान के कारण सदा से ‘विश्व गुरु’ के रूप में प्रसिद्ध रहा है। भारत, वैश्विक भाईचारे व शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में यकीन रखता है। इसे भी पढ़ें : भाजपा की आर्थिक नीतियों पर सभी को संदेह: मनमोहन उन्होंने कहा कि जो जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करते हैं, उनके लिए चुनौतियां अवसर बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया व स्किल इंडिया जैसी योजनाओं के शुरुआत से युवाओं के लिए स्वरोजगार व रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा हुए हैं।

नयी शिक्षा नीति के लिए दो लाख सुझाव

केन्द्र सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए राज्यों और संबंधित पक्षों से व्यापक विचार विमर्श के बाद नयी शिक्षा नीति के मसौदे को अंतिम रुप दे रही है ।

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