इस ईद को मुसलमान नहीं भूलेगा!
और सभी तरह के मुसलमान। शिया हो या सुन्नी, देवबंदी हो या बरेलवी, कश्मीर के अब्दुल्ला-मेहबूबा-इंजीनियर हों या हैदराबाद के ओवैसी या फिर मलेशिया-खाड़ी में दुबके जाकिर नाईक हों या दाऊद, या इस्लामाबाद में फील्ड मार्शल मुनीर से लेकर लादेन, बगदादी के तमाम तरह के अनुयायी। सभी गरजने और भौकाल बनाने वाले! पृथ्वी पर छितरे इस्लाम के सवा दो अरब बंदों को तरह-तरह से बहकाते हुए। जैसे यह कि अल्लाह ने अपनी पवित्र भूमि में रेत से अधिक धन बिखेरा। पानी की जगह तेल दिया। मुझे ध्यान है, कुछ दशक पहले भारत में ट्रकों के नीचे की तेल की टंकी...