‘एक दीवाने की दीवानियत’ — टॉक्सिक जूनून
‘एक दीवाने की दीवानियत’ पर सबसे बड़ा प्रश्न इसका ‘संदेश’ है। क्या यह फिल्म प्यार की ताकत दिखाती है या प्यार के नाम पर नियंत्रण की संस्कृति को बढ़ावा देती है? विक्रम का किरदार अपने प्रेम को इतनी तीव्रता से जीता है कि वह दूसरे की स्वतंत्रता का अतिक्रमण कर देता है। यह वही समस्या है जो हमारे समाज में ‘टॉक्सिक रोमांस’ की कहानियों के साथ बार-बार दोहराई जाती है — “अगर वो ना कहे तो और प्यार दिखाओ, पीछा करो, तब तक जब तक हां न कह दे।” सिने-सोहबत आज के सिने-सोहबत में हालिया रिलीज़ हुई फ़िल्म 'एक दीवाने...