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  • शिक्षा, परीक्षा दोनों लापता

    भारत की शिक्षा प्रणाली और परीक्षा की व्यवस्था को लेकर इन दिनों पूरे देश में चर्चा हो रही है। यह चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि मेडिकल में दाखिले के लिए हुई नीट यूजी के पेपर लीक हो गए और परीक्षा दोबारा करानी पड़ी। 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी और उससे पहले 12 युवाओं ने आत्महत्या करके जान दे दी है। 12वीं की बोर्ड में सीबीएसई ने ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का जो सिस्टम बनाया उसकी गड़बड़ियों से भी लोगों की नजर इसकी ओर गई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये दोनों बड़ी घटनाएं कोई अपवाद हैं। यह...

  • समस्या से खराब समाधान है

    पेपर लीक के कारण नीट की परीक्षा रद्द होने और 12वीं के बोर्ड की परीक्षा में मूल्यांकन की ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम की व्यवस्था से लाखों छात्रों को हुई परेशानी का मामला भाजपा की केंद्र सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द है। यह सीधे युवाओं से जुड़ा मामला है, जिसके लिए नेपाल की क्रांति के बाद जेन जी का जुमला खूब लोकप्रिय हुआ है। राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेता भी जेन जी से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब तक इस समूह को सरकार के कामकाज से ज्यादा मतलब नहीं था। उसने दुनियादारी नहीं देखी थी और न नौकरी...

  • पढ़ाई और परीक्षा के बुरे दिन

    इन दिनों पढ़ाई औऱ परीक्षा के बुरे दिन चल रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक शिक्षा की गुणवत्ता गिर गई है और बोर्ड परीक्षा से लेकर दाखिले व नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षाओं पर संकट है। अगर पढ़ाई की बात करें तो कोविड महामारी के बाद हुए कई सर्वेक्षणों से पता चला कि बच्चों के सीखने की प्रक्रिया यानी लर्निंग प्रोसेस में गड़बड़ी हुई है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति यह है कि छठी या सातवीं के बच्चे हिंदी की 10 पंक्तियों का शुद्ध पाठ नहीं कर पाते हैं। अपने दर्जे से कई...

  • परीक्षा में कुत्ते के विकल्प में ‘राम’ शामिल

    महासमुंद, भाषा। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी स्कूलों की चौथी कक्षा की छमाही परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र में एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में ‘राम’ नाम शामिल किया गया था। बुधवार को हुए अंग्रेजी के पेपर में छात्रों से “मोना के कुत्ते” का नाम पहचानने को कहा गया था, जिसमें चार विकल्प दिए गए थे—बाला, शेरू, राम और कोई नहीं। मामला सामने आने के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने भगवान राम के रूप में पूजे जाने वाले नाम को कुत्ते के नाम के विकल्प में शामिल करने...

  • दिल्ली में कैसी शिक्षा क्रांति हुई है?

    अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ साथ पूरा आम आदमी पार्टी दिल्ली में शिक्षा क्रांति का प्रचार करता रहा। आम आदमी पार्टी दिल्ली में भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर सत्ता में आई थी। उसे लोकपाल बनाना था। लेकिन लगभग संपूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद वह लोकपाल, भ्रष्टाचार आदि मामले भूल गई और शिक्षा क्रांति करने लगी। दावा किया गया कि दिल्ली में शिक्षा की व्यवस्था ऐसी हो गई है कि लोग अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों में करा रहे हैं। निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन सुधरने के बड़े बड़े...

  • परीक्षाओं में अंकों की होड़ क्यों?

    आवश्यक है कि विद्यालयों में गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ परीक्षाओं में सफलता का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर न किया जाए, बल्कि छात्रों की संपूर्ण योग्यता और कौशल को ध्यान में रखा जाए। जब शिक्षा का असली उद्देश्य ज्ञानार्जन बनेगा, तभी समाज का वास्तविक विकास संभव होगा। देश में वार्षिक परीक्षाएँ छात्रों के भविष्य को निर्धारित करने का प्रमुख माध्यम हैं। लेकिन हाल के वर्षों में, शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान अर्जन से हटकर केवल उच्च अंक प्राप्त करने तक ही सीमित होता जा रहा है। खासकर देहाती क्षेत्रों के विद्यार्थी अब नियमित कक्षाओं में पढ़ने की बजाय कोचिंग...

  • फेल बच्चे अब प्रमोट नहीं होंगे

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म कर दी है। इसका मतलब है कि अब बच्चे फेल होंगे तो उन्हें प्रमोट नहीं किया जाएगा। फेल होने वाले बच्चों की फिर से परीक्षा होगी और दोबारा फेल होने पर उनको उसी क्लास में रहना होगा। इससे पहले सर्व शिक्षा नीति के तहत बच्चों को फेल होने के बाद भी प्रमोट करने का नियम बनाया गया था। कहा गया था कि फेल होने से बच्चों का मनोबल गिरता है और उनके आत्मविश्वास को चोट पहुंचती है, जिससे वे स्कूल छोड़ देते...

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