आज वापस घरों को लौटेंगे किसान! दोपहर में कर सकते हैं आंदोलन समाप्ति का ऐलान

किसानों और सरकार के बीच सहमति बन गई है। जिसके चलते किसान संगठन आज बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर बैठक करने जा रहे हैं जिसमें आंदोलन को खत्म करने का ऐलान किया जा सकता है।

किसान आंदोलन खत्म करने की तैयारी

संसद के दोनों सदनों से विवादित कृषि कानूनों की वापसी का बिल पास होने के बाद अब किसान आंदोलन खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है।

देशहित में वापिस हुए कृषि कानून

कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद किसान-आंदोलन जारी क्यों है?- क्योंकि यह आंदोलन कभी भी किसानों द्वारा किसान हितों के लिए था ही नहीं।

किसानों का ट्रैक्टर मार्च टला, छह नए प्रस्ताव रखे

किसानों ने संसद तक ट्रैक्टर मार्च टालने का फैसला कर केंद्र सरकार के सामने छह नए प्रस्ताव रखे।

किसानों के अलावा अपने दल के लोगों को भी नहीं समझा पाये मोदी जी…?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के नाम संदेश में स्वीकार किया था की वे क्रशि कानूनों के फायदे किसानो को नहीं समझा पाये।

क्या सरकार एमएसपी की मांग मानेगी?

किसान चाहते हैं कि सरकार कानून बना वह व्यवस्था करे जिससे हर किसान को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके।

किसान जीते या मोदी हारे अलबत्ता मीडिया जीता!

कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के संदर्भ में स्वेट मॉर्डन की कही बात फ़िर सच साबित हो गई। इस महान विचारक ने कहा था कि जब तक क़यामत नहीं आ जाती ,तब तक दो चीज़ों की अनिवार्यता हरदम बनी रहेगी  ।

कानूनों के वापस का बयान— संसद से निरस्त होने तक भरोसा नहीं

साल भर चले अहिंसक किसान आंदोलन को मोर्चा तब तक नहीं स्वीकार करेगा, जब तक उन्हे संसद द्वारा निरस्त नहीं किया जाता। 

माईबाप सरकार और किसान

लोकतंत्र की यह खूबी बहुत विशिष्ट है। इतनी ताकतवर सरकार बहुत कम पढ़े लिखे किसानों को अपनी तमाम ताकतों व कोशिशों के बावजूद लंबे समय से दिए जा रहे धरने को समाप्त कर अपना आंदोलन वापस लेने के लिए राजी नहीं

किसान आंदोलन का संदर्भ

2017-18 में भी मजबूत किसान आंदोलन उठा था। एमएसपी की कानूनी गारंटी तब उसकी केंद्रीय मांग थी। उस आंदोलन के बारे में विश्लेषकों की राय बनी थी कि 2019 के आम चुनाव में वही प्रमुख नैरेटिव होगा।

केंद्र पर किसानों का हमला

किसानों संगठनों ने सोमवार को लखनऊ में महापंचायत की और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला।

लखनऊ में आज किसानों की महापंचायत, टिकैत ने किसानों को दिया नारा- ‘चलो लखनऊ-चलो लखनऊ’

राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत के लिए किसानों से बड़ी संख्या में आने की अपील की है। जिसके लिए ‘चलो लखनऊ-चलो लखनऊ’ नारा भी दिया गया है।

एक अहिंसक आंदोलन ने एक प्रधानमंत्री को घुटने पर बैठा दिया

साल में सात दिन कम लगे – पर केंदीय सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी को दूसरी बार अपना फैसला बदलने पर मजबूर किया !

संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में हुआ बड़ा फैसला, पीछे नहीं हटेंगे किसान, अब 29 नवंबर को संसद कूच

किसान संगठनों ने 29 नवंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद कूच करने का ऐलान कर रखा है जिसे भी वे जारी रखेंगे और संसद कूच करेंगे।

कृषि कानून वापस लेने के बाद किसान आंदोलन को लेकर किसान नेताओं का बड़ा फैसला…

प्रधानमंत्री के कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले के बाद अब किसान आगे की रणनीति के लिए 20 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रहे है।

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