तूफान तो आते ही रहेंगे!

जब समस्या पता है, तो उसको लेकर कितनी जागरूकता पैदा गई है? आखिर उससे ही वो राह निकलेगी, जो समाधान की तरफ ले जाएगी। पश्चिम में आज जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता का ऊंचा स्तर नजर आता है। लेकिन भारत में यह कोई समस्या भी है, इसका भान आम लोगों को नहीं है। कुछ साल… Continue reading तूफान तो आते ही रहेंगे!

दुनिया ने आखिर क्या सीखा?

दिल्ली की हवा फिर से खराब हो गई है। यह महज नमूना भर है कि अब जबकि लॉकडाउन के बाद आम गतिविधियां बहाल हो रही हैं, तो फिर पर्यावरण का क्या हाल होने जा रहा है। यह सच है कि लॉकडाउन से और चाहे जो नुकसान हुआ हो, लेकिन पर्यावरण का इससे भला हुआ था

आपदाओं से त्रस्त दुनिया

संयुक्त राष्ट्र एक वैश्विक संस्था के रूप में दुनिया पर मंडरा रहे खतरों के बारे में समय-समय पर चेतावनी देता है। मगर क्या उनका कोई असर होता है? ये सवाल इसलिए उठता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर पिछले तीस साल संयुक्त राष्ट्र की लगातार सक्रियता के बावजूद दुनिया में इसे रोकने के प्रभावी कदम आज तक नहीं उठाए गए।

बेलगाम है ग्लोबल वॉर्मिंग

कोरोना महामारी के बीच भले जलवायु परिवर्तन की चर्चा दब गई हो, लेकिन ये खतरा टला नहीं है। बल्कि बढ़ता जा रहा है।

आसन्न खतरे का आईना

ये रिपोर्ट अभी औपचारिक रूप से जारी होनी है, मगर एक विदेशी वेबसाइट ने इसमें मौजूद बातों की जानकारी पहले ही दे दी है। इससे सामने आई बातें चिंता बढ़ाने वाली हैं।

बेकाबू होता ग्लोबल वॉर्मिंग

जलवायु परिवर्तन रोकने में दुनिया नाकाम हो रही है। हर आने वाली रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस सदी के अंत तक धरती का तापमान 3 डिग्री से अधिक बढ़ सकता है।