History

  • इतिहास राख में ही लोटपोट रहता है!

    दुनिया हमेशा धुएँ की हल्की-सी गंध में जीती आई है, कुछ स्मृति से उठती, कुछ स्थाई या घटना विशेष से जलती हुई। यदि इतिहास से उसका रोमांच निकाल दे, तो जो बचता है वह बस मलबा है विरासत के वस्त्रों में सजा हुआ। ट्रॉय की राख, यूरोप की खाइयाँ, हिरोशिमा की चमक, काबुल की धूल। हर सदी शांति के प्रवचन से शुरू हुई। पर खत्म विनाश पर हुई। हथियार बदले हैं, तलवारें अब ड्रोन हैं, उपनिवेश अब “क्लाइंट स्टेट”, जबकि प्रवृत्ति वही है: वर्चस्व की, जिसे नियति के नाम पर पेश किया जाता है। चारों ओर देखिए। दुनिया फिर घावव...

  • नक़्शे, झूठ बोलते हैं और इतिहास के घाव भी!

    नक़्शा—तीन अक्षरों का छोटा-सा शब्द, मासूमियत से भरा और तभी  अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाने वाला। हमें सिखाया गया कि यह बस दुनिया का एक चित्र है। एक पन्ना जिस पर महाद्वीप ऐसे चिपके हैं मानो नीले समुद्र पर तैरते कागज़ी कट-आउट हों। अक्षांश-देशांतर की रेखाएँ उसे थामे रहती हैं, भूमध्य रेखा बेल्ट की तरह उसे संतुलन देती है। बच्चे के लिए यह तथ्य है,  छात्रों के लिए पाठ, और हममें से अधिकतर के लिए एक सामान्य आवश्यकता। लेकिन नक़्शा, यह छोटा शब्द, असल में बहुत भारी और महत्वपूर्ण  है। नक़्शे कभी मासूम नहीं होते। वे निष्पक्षता का भ्रम रचते हैं,...

  • उथलपुथल का नया इतिहास!

    वह 1989 का साल था। यूरोप में कम्युनिज्म पतन की राह पर था। तभी फ्रांसिस फुकुयामा का एक विचारोत्तेजक लेख प्रकाशित हुआ। उसका शीर्षक था ‘द एंड ऑफ हिस्ट्री’ (इतिहास का अंत)। लेखक का दावा था कि बीसवीं सदी में लोकतंत्र ने अधिनायकवादी प्रवृत्तियों को परास्त कर दिया है, यह मानव जाति के वैचारिक विकास का चरम बिंदु है और यह भी कि पश्चिमी उदारवादी लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित शासन व्यवस्था अब पूरी दुनिया में स्थापित हो जाएगी। उनका यह दावा और नजरिया, उस समय के घटनाक्रम में प्रतिबिंबित भी हो रहा था। वैसा ही कुछ होता हुआ लगता था।...

  • आंखों के आगे इतिहास!

    हां, आंखों देखा इतिहास! ऐतिहासिक मोड़ पर है मौजूदा सिरमौर सभ्यता अमेरिका। वह इस सप्ताह अपने हाथों अपनी सभ्यता का इतिहास बनाएगी। अमेरिकी मतदाता तय करेंगे कि वे अपने सभ्यतागत मूल्यों और सांचे की निरंतरता में कमला हैरिस को जिताते हैं या वैयक्तिक तानाशाही जिद्द वाले डोनाल्ड़ ट्रंप को जिताते हैं। डोनाल्ड ट्रंप का अर्थ अमेरिका में विभाजन, संस्थाओं के पतन की गारंटी है। और जब कोई सभ्यता घर में विभाजित होती है तो उसकी ताकत, एकता, बुद्धि सब धरी रह जाती है। दो खेमों में विभाजित देश फिर धर्म, नस्ल, धन और अहंकार की आपसी लड़ाई का अखाड़ा होता...