inequality

  • असमानता और नियति ‘सुपरपावर इन वेटिंग!

    लंदन के द इकॉनोमिस्ट ने ठिक लिखा कि “यदि अमेरिका भारत को अलग-थलग करता है, तो यह उसकी ऐतिहासिक भूल होगी। जबकि भारत के लिए अपनी सुपरपावर बनने की दावेदारी को परखने का यह मौका है।” पहली नज़र में वाक्य सुकून देता है — जैसे अमेरिका ग़लती करेगा अगर डगमगाया, और भारत नियति के द्वार पर खड़ा है। पर ध्यान से सुनें तो यह तारीफ़ नहीं, टालमटोल है। सुपरपावर-इन-वेटिंग यानी अभी नहीं। याकि महज नारे जिनमें जान नहीं, प्रदर्शन जिसमें ताक़त नहीं। एंकर की तरह तीन शब्द हमें बाँध देते हैं। एक ऐसा राष्ट्र जो अपने ही भविष्य की कतार...

  • नए अनुसंधान, गैर-बराबरी बढ़ रही

    अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी ने अपनी पेरिस स्थित संस्था Inequality Lab की नई रिपोर्ट को सोशल मीडिया साइट X पर शेयर करते हुए महत्त्वपूर्ण बात कही है। तो सबसे पहले उनकी उस टिप्पणी पर ही गौर करते है। उन्होंने कहा- “inequalitylab.world पर डॉ. डी. लेइते की नई शोध रिपोर्टः कंपनियां हैं टैक्स छिपाने का अड्डाः निजी खर्चों को बताया जाता है कंपनी का खर्च। सामने आए मुख्य तथ्यः जो व्यक्ति कंपनियों को नियंत्रित करते हैं, वे अपना 36 प्रतिशत व्यक्तिगत खर्च कंपनियों के बजट में डाल देते हैं।  निष्कर्षः जितना अब तक अनुमान था, असल गैर-बराबरी उससे काफी ज्यादा है। धन...