inequality

  • गैर-बराबरी रोग है या लक्षण?

    गैर-बराबरी पर गंभीरता से विचार करने के क्रम में पहला सवाल यह सामने आता है कि यह अपने-आप में एक समस्या है या मौजूदा आर्थिक का लक्षण भर है? मुद्दा यह है कि अगर उत्पादन के साधनों पर कुछ व्यक्तियों या व्यक्ति-समूहों का नियंत्रण रहेगा, तो यह कैसे संभव है कि उत्पादन से उत्पन्न धन का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी जेब में ना जाए? तर्क दिया जा सकता है कि सरकारों के दखल से ऐसा करना संभव है? हाल में आई दो रिपोर्टों ने देशों के अंदर और विभिन्न देशों के बीच बढ़ती आर्थिक गैर-बराबरी पर फिर रोशनी डाली है।...

  • गहरी असमानता का देश है भारत

    यह निष्कर्ष पुराना है कि भारत एक गहरी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक असमानता वाला देश है। सामाजिक असमानता में जातीय, धार्मिक और लैंगिक असमानता सब शामिल है। यह निष्कर्ष हर साल आने वाली इनइक्वलिटी लैब की रिपोर्ट से प्रमाणित होता है। इस साल की फ्रांस की इनइक्वलिटी लैब की रिपोर्ट बुधवार, 10 दिसंबर को प्रकाशित हुई। पिछले साल के मुकाबले इस रिपोर्ट में ज्यादा कुछ नहीं बदला है। भारत की एक फीसदी आबादी के पास देश की 40 फीसदी संपत्ति है। अगर इसका दायरा थोड़ा बड़ा करें तो दिखेगा कि शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास कुल संपत्ति का 65...

  • विषमता है एक घुन

    जिस छोटे से तबके के हाथ में धन केंद्रित होता है, सरकारी नीतियों पर उसका शिकंजा कस जाता है। यानी गैर-बराबरी ऐसा घुन है, जो लोकतंत्र को कुतर डालती है। भारत में अमीर- गरीब की खाई तेजी से बढ़ी है। भारत में आर्थिक गैर-बराबरी अत्यधिक बढ़ चुकी है, यह कोई नया तथ्य नहीं है। नई बात सिर्फ यह है कि इस बार जी-20 समूह की तरफ से नियुक्त मशहूर अर्थशास्त्रियों के टास्क फोर्स ने इस ओर ध्यान खींचा है। जोसेफ स्टिग्लिट की अध्यक्षता वाले इस टास्क फोर्स ने गैर-बराबरी बढ़ने के परिणामों का भी उल्लेख किया है। साथ ही बताया...

  • असमानता और नियति ‘सुपरपावर इन वेटिंग!

    लंदन के द इकॉनोमिस्ट ने ठिक लिखा कि “यदि अमेरिका भारत को अलग-थलग करता है, तो यह उसकी ऐतिहासिक भूल होगी। जबकि भारत के लिए अपनी सुपरपावर बनने की दावेदारी को परखने का यह मौका है।” पहली नज़र में वाक्य सुकून देता है — जैसे अमेरिका ग़लती करेगा अगर डगमगाया, और भारत नियति के द्वार पर खड़ा है। पर ध्यान से सुनें तो यह तारीफ़ नहीं, टालमटोल है। सुपरपावर-इन-वेटिंग यानी अभी नहीं। याकि महज नारे जिनमें जान नहीं, प्रदर्शन जिसमें ताक़त नहीं। एंकर की तरह तीन शब्द हमें बाँध देते हैं। एक ऐसा राष्ट्र जो अपने ही भविष्य की कतार...

  • नए अनुसंधान, गैर-बराबरी बढ़ रही

    अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी ने अपनी पेरिस स्थित संस्था Inequality Lab की नई रिपोर्ट को सोशल मीडिया साइट X पर शेयर करते हुए महत्त्वपूर्ण बात कही है। तो सबसे पहले उनकी उस टिप्पणी पर ही गौर करते है। उन्होंने कहा- “inequalitylab.world पर डॉ. डी. लेइते की नई शोध रिपोर्टः कंपनियां हैं टैक्स छिपाने का अड्डाः निजी खर्चों को बताया जाता है कंपनी का खर्च। सामने आए मुख्य तथ्यः जो व्यक्ति कंपनियों को नियंत्रित करते हैं, वे अपना 36 प्रतिशत व्यक्तिगत खर्च कंपनियों के बजट में डाल देते हैं।  निष्कर्षः जितना अब तक अनुमान था, असल गैर-बराबरी उससे काफी ज्यादा है। धन...