खड़गे और देवगौड़ा राज्यसभा में जाएंगे!

कर्नाटक में इस साल जून में राज्यसभा की चार सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से दो सीटें भाजपा को मिलेंगी और एक सीट कांग्रेस को मिलेंगी। अगर कांग्रेस ने समर्थन किया तो जेडीएस को एक सीट मिल सकती है।

विपक्षी एकता की पहल कौन करेगा?

जेडीएस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर राजनीति करने की अपील की है। पर सवाल है कि यह एकता बनाने की पहल कौन करेगा? पिछले दिनों नागरिकता कानून के बहाने कांग्रेस ने पहल की थी।

कर्नाटक उपचुनाव: 15 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू

बेंगलुरु। कर्नाटक में 15 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में मतदान शुरु हो गया है। यह उपचुनाव भाजपा क येदीयुरप्पा सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन उपचुनाव में कम से कम भाजपा को 6 सीटों पर जीत हासिल करना होगी तभी उसकी सरकार बच पाएगी। कर्नाटक सरकार ने राज्य की 15 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर इन विधानसभा क्षेत्रों में आज अवकाश की घोषणा की है। सरकार की आेर से बुधवार को जारी की गयी अधिसूचना के अनुसार सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों में छुट्टी रहेगी, जिन क्षेत्रों में पांच दिसंबर को मतदान होने वाला है। विधान सौध, विकास सौध और एमएस बिल्डिंग में स्थित दफ्तरों में सामान्य रूप के कामकाज होंगे। इसके अलावा ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनका नाम उपचुनाव वाले क्षेत्रों में मतदाता के तौर पर दर्ज है और वह किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हैं, वे भी अपने मताधिकार के इस्तेमाल के लिए छुट्टी ले सकते हैं।

कर्नाटक में क्या और विधायकों के इस्तीफे होंगे?

कर्नाटक में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू होता दिख रहा है। राज्य की 15 विधानसभा सीटों पर पांच दिसंबर को होने वाले उपचुनावों के नतीजे को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के नेता बहुत भरोसे में नहीं हैं। कहा जा रहा है कि मुकाबला बराबरी का रह सकता है।

कांग्रेस-जेडीएस क्या फिर साथ आएंगे?

महाराष्ट्र के बाद अब सबकी नजर कर्नाटक पर है। पांच दिसंबर को वहां 15 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। इसके नतीजे वहां की राजनीति को पूरी तरह से बदल सकते हैं। एक तरफ भाजपा दावा कर रही है कि वह सभी 15 सीटों पर जीतेगी तो दूसरी ओर कांग्रेस और जेडीएस ने दावा किया है

किसके साथ है देवगौड़ा की पार्टी

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा थाली के बैंगन की तरह हैं। वे और उनकी पार्टी कब किसके साथ होते हैं यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। उनकी पार्टी ने कांग्रेस से तालमेल करके राज्य में सरकार बनाई। फिर सरकार गिर गई तो दोनों पार्टियां अलग हो गईं।

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