Jio

  • जियो का शेयर खुलते ही 238 रुपये चढ़ा

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 20 प्रतिशत से अधिक प्रीमियम के साथ बुधवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गया। प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में जियो के शेयर का आवंटन 1,119 रुपये की ऊपरी सीमा पर हुआ था। कंपनी का शेयर आज खबर लिखे जाने तक 238 रुपये यानी 21.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,357 रुपये पर था। जियो का आईपीओ 21-23 अक्टूबर को आया था। कुल 30,213 करोड़ रुपये के देश से सबसे बड़े आईपीओ के लिए 22 गुना से अधिक बोली प्राप्त हुई थी। शेयरों का आवंटन 26 अक्टूबर को कर दिया गया...

  • जियो ने रचा इतिहास, पहली बार किसी आईपीओ के लिए आए एक करोड़ आवेदन

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) ने एक करोड़ आवेदन के साथ नया इतिहास लिख दिया है। कंपनी सूत्रों ने दावा किया कि भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार किसी आईपीओ में आवेदनों की संख्या एक करोड़ के पार पहुंच गई है। यह एक विश्व कीर्तिमान भी है। आईपीओ के तीसरे और आखिरी दिन दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ में अब तक 1,00,15,118 आवेदन आ चुके हैं। आईपीओ कुल 6.89 गुना सबस्क्राइब हो चुका है। बड़े संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 14.38 गुना सबस्क्रिप्शन मिला है। इससे पहले...

  • जियो की भारत से बाहर विस्तार की योजना

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स देश के बाहर भी बड़े पैमाने पर विस्तार की योजना बना रहा है जिसमें अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देश भी शामिल हैं। जियो के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने यहां शनिवार को कंपनी के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले ब्रोकरों के साथ संवाद के दौरान बताया कि जियो भारत से बाहर विस्तार के लिए 11-12 रणनीतिक साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है। इससे उसे 150 करोड़ नए ग्राहक मिलने की उम्मीद है। Also Read : माहेला जयवर्धने ने छोड़ा मुंबई इंडियंस के हेड कोच का पद उल्लेखनीय है कि अगस्त 2026...

  • फिर कॉरपोरेट बेलआउट

    जब ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो उसके लिए तर्क गढ़ लिए जाते हैँ। रोजगार बचाना आम दलील है। वीआई के मामले में यह भी कहा गया कि कंपनी फेल हुई, तो बाजार में जियो और एयरटेल का द्वि-अधिकार हो जाएगा। आलोचक अक्सर कहते हैं कि मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था का वास्तविक अर्थ हैः फायदे का निजीकरण और घाटे का समाजीकरण। यानी जो फायदा हुआ, वह कंपनी मालिकों की जेब में जाएगा, लेकिन घाटा हुआ, तो उसे करदाताओं के पैसे भरा जाएगा। यह प्रवृत्ति अब बेहद आम हो चुकी। लेकिन इस कारण आर्थिक प्रबंधन का यह ढांचा आम जन की निगाह...

  • यही तो समस्या है

    बड़ी कंपनियों से अपेक्षा महज सर्विस प्रोवाइडर बन जाने की नहीं है। अपेक्षा भारत में आरएंडडी का ढांचा बनाने की है। वरना, एआई के मामले में अमेरिका या चीन पर निर्भर बने रहना भारत की नियति बनी रहेगी। रिलायंस इंडस्ट्री के बारे में कभी कहा जाता था कि उसके प्रवर्तक अपने मातहतों को “बड़ा सोचने” की सलाह देते हैं। कई दशकों के बाद अब सामने यह है कि उस “बड़ी सोच” का नतीजा कंपनी के मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर मोनोपॉली कायम करने के रूप में जरूर आया, मगर उसका भारत में अनुसंधान- विकास (आरएंडडी)...