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  • एनसीपी का ड्रामा चलता रहेगा

    शरद पवार से ज्यादा राजनीतिक दांवपेंच जानने वाला नेता इस देश में कम ही हुआ। लेकिन अब वे उम्र के जिस पड़ाव पर हैं वहां से वे राजनीति को वैसे हैंडल नहीं कर पा रहे हैं, जैसा करते थे। इसके बावजूद उनको इस बात का एडवांटेज है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके प्रति सद्भाव रखते हैं। तभी महाराष्ट्र के भाजपा और शिव सेना नेताओं को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी ऐसा काम नहीं करना है, जिससे शरद पवार को परेशानी हो। यानी उनकी पार्टी का क्या होना है यह तय...

  • एनसीपी के बाद बाकी पार्टियों की बारी

    एनसीपी ने हथियार डाल दिए हैं। पार्टी टूटने की आशंका में शरद पवार ने भाजपा के सामने सरेंडर किया। उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉऩ्फ्रेंस करके कहा कि अगर सरकार हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का भरोसा देती है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करने को तैयार है। कहने की जरुरत नहीं है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की पूरी स्क्रिप्ट कहीं और से लिख कर दी गई थी। यह भी सबको पता है कि अप्रैल में 16 से 18 के बीच विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन बिल पर चर्चा...

  • एनसीपी का मामला कौन उलझा रहा है

    यह लाख टके का सवाल है कि सुनेत्रा पवार की पार्टी एनसीपी का मामला कौन उलझा रहा है? वे एनडीए में हैं और उनकी पार्टी महाराष्ट्र की सरकार में शामिल है। भाजपा में किसी के साथ टकराव या किसी की नाराजगी का भी कोई मामला नहीं है क्योंकि वे अपने पति अजित पवार के निधन के बाद ही पार्टी के कामकाज में ज्यादा सक्रिय हुई हैं। फिर भी ऐसा लग रहा है कि उनको परेशान करने की राजनीति हो रही है। सामने से चेहरा उनकी पार्टी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल का दिख रहा है लेकिन अकेले उनमें इतनी राजनीतिक...

  • पवार की पार्टी के टूटने का खतरा

    शरद पवार इन दिनों बहुत बेचैन हैं। उनको लग रहा है कि उनकी पार्टी टूट सकती है। इसलिए वे टूटने से पहले दोनों एनसीपी का विलय करा कर उसे एनडीए में स्थापित करना चाहते हैं। उनका प्रस्ताव है कि उनके लोकसभा सांसद अगर एनडीए में शामिल हो जाते हैं तो नरेंद्र मोदी की सरकार को लोकसभा में तीन सौ से ज्यादा सांसदों का समर्थन प्राप्त हो जाएगा। अभी एनडीए के 293 सांसद हैं। दिल्ली में भाजपा के नेताओं को यह प्रस्ताव पसंद आ रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पक्ष में हैं कि शरद...

  • पवार परिवार के फैसले पर कांग्रेस की नजर

    अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार क्या फैसला करता है इस पर कांग्रेस की नजर है। हालांकि कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा कि उस फैसले पर कांग्रेस यै किसी दूसरी विपक्षी पार्टी का कोई जोर नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी है जरूर लेकिन उसके नेताओं का आपस में कोई संवाद नहीं है। सब अपने फैसले खुद करते हैं। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद यह बदलाव आया लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव ने इस बिखराव को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेताओं को पता है कि शरद पवार अब अपने परिवार की राजनीति को...

  • विलय का मामला अटक जाएगा

    बारामती। अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार को लग रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच विलय के लिए चल रही बातचीत रूक जाएगी और फैसला अटक जाएगा। उन्होंने शनिवार को बारामती में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि चार महीने से इसकी बातचीत चल रही थी। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के साथ मिल कर काम करने पर सहमति बन गई थी। उन्होंने शनिवार को कहा, ‘यह अजित पवार की भी इच्छा थी। इसे जरूर पूरा होना चाहिए’। हालांकि अब यह मामला आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है। विलय की बात जब चल रही थी तब अजित पवार...

  • एनसीपी विलय बाद भी एनडीए में रहेगी

    शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की पार्टियों का विलय होगा। यह सिर्फ समय की बात है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मार्च में राज्यसभा चुनाव से पहले इसकी घोषणा हो सकती है क्योंकि दोनों पार्टियों को तय करना है कि शरद पवार राज्यसभा जाएंगे या रिटायर होंगे। वैसे महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन के पास भी इतनी संख्या हो जाती है कि वह एक सदस्य को राज्यसभा भेज सके। लेकिन गठबंधन की तीन पार्टियों में शरद पवार की पार्टी सबसे छोटी है। राज्यसभा सीट पर उद्धव ठाकरे की शिव सेना और कांग्रेस दोनों दावा करेंगे। दूसरी ओर पवार...

  • एनसीपी की एकता बनने ही वाली है

    अजित पवार हालांकि अब इनकार करने लगे हैं लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि शरद पवार की बनाई पार्टी एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय होने वाला है। यह सिर्फ टाइमिंग का मामला है। गौरतलब है कि दोनों पार्टियों के नेता अभी सदमे में हैं। पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और परभणी में जिस तरह के नतीजे आए उसकी कल्पना दोनों ने नहीं की थी। हालांकि यह भी हकीकत है कि 2017 के नगर निगम चुनाव में भी इन शहरों में भाजपा और शिव सेना की ही जीत हुई थी लेकिन इस बार अजित पवार ने सोचा था कि चाचा शरद...

  • एनसीपी के दोनों खेमे एक साथ आए

    एनसीपी प्रमुख और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार के जमीन विवाद में भले शरद पवार ने यह लाइन पकड़ी की इस मामले की जांच होनी चाहिए लेकिन राजनीतिक रूप से अजित पवार और शरद पवार खेमा नजदीक आ रहा है। जमीन के मामले में भी शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने पार्थ का पक्ष लिया और कहा कि वे गलत नहीं कर सकते हैं। बहरहाल, खबर है कि राज्य में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले एक चुनाव में दोनों पार्टियां साथ आ गई हैं। इसे स्थानीय निकाय चुनाव का रिहर्सल माना जा...

  • एनसीपी का विलय हुआ तो कांग्रेस को फायदा

    शरद पवार और अजित पवार की पार्टियों का विलय होने की चर्चा चल रही है। अगर दोनों पार्टियां एक हो जाती हैं तो उसका सबसे बड़ा लाभ कांग्रेस को होगा। शरद पवार ने कांग्रेस का ही वोट लेकर राजनीति की थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर 1999 में अपनी पार्टी बनाई थी और अपने साथ साथ कांग्रेस के वोट आधार का एक अच्छा खासा हिस्सा ले गए थे। मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र में, जहां कांग्रेस का मजबूत आधार था वही पर शरद पवार की एनसीपी का भी आधार बना। पहले चुनाव में यानी 1999 में तो वे कांग्रेस से...

  • सहयोगियों के बागी विधायक फड़नवीस से खुश

    Maharashtra politics: महाराष्ट्र में भाजपा की दो सहयोगी पार्टियों, शिव सेना और एनसीपी के कई विधायक बागी तेवर दिखा रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद मंत्री बनने से वंचित रह गए कम से कम आधा दर्जन  विधायकों ने तेवर दिखाए थे। उन्होंने खुलेआम नाराजगी जताई थी। एकनाथ शिंदे की पार्टी के एक विधायक ने तो पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी के पदों से इस्तीफा देने वाले विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने शिव सेना के नेता एकनाथ शिंदे से तो नाराजगी जताई लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के प्रति सद्भाव दिखाया। कहा जा रहा है...

  • महायुति में सब कुछ ठीक नहीं है

    महाराष्ट्र में महायुति यानी भाजपा, शिव सेना और एनसीपी की सरकार बनने के बाद पहले दिन से खींचतान शुरू हो गई है, खत्म नहीं हो रही है। सरकार बनने यानी मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों के शपथ लेने के 10 दिन बाद मंत्रिमंडल का गठन हुआ और उसके अगले दिन से नागपुर में विधानसभा का सत्र शुरू हुआ। सत्र के पहले तीन दिन उप मुख्यमंत्री अजित पवार लापता रहे। कहा गया कि वे दिल्ली के दौरे पर हैं। सवाल है कि मंत्रिमंडल के गठन के लिए तो वे कई दिन दिल्ली में थे और अब जबकि सत्र शुरू हो गया...

  • मर्करवाड़ी गांव में इस मतदान का क्या अर्थ?

    महाराष्ट्र में शोलापुर के एक गांव मर्करवाडी के लोगों ने एक नया प्रयोग किया है। उन्होंने विधानसभा चुनाव के नतीजे देखने के बाद अपने गांव में बैलेट पेपर से दोबारा मतदान कराया है। असल में गांव के लोगों को शक है कि ईवीएम से उनके वोट में गड़बड़ी की गई है। पूरे गांव का कहना है कि उन्होंने महाविकास अघाड़ी को वोट दिया लेकिन गिनती में महाविकास अघाड़ी से ज्यादा वोट महायुति के उम्मीदवार को मिले हैं। यह भी दिलचस्प है कि मर्करवाड़ी गांव मालशिरास विधानसभा सीट में आता है, जो सीट महाविकास अघाड़ी में शामिल शरद पवार की पार्टी...

  • आज हो सकता है सीएम का फैसला

    Maharshtra New CM:  महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 10 दिन होने जा रहे हैं और मुख्यमंत्री का सस्पेंस खत्म नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम का फैसला हो सकता है। जानकार सूत्रों के मुताबिक भाजपा के नेता देवेंद्र फड़नवीस के नाम पर सहमति बनी है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि सोमवार यानी दो दिसंबर को मुख्यमंत्री का नाम तय होगा। हालांकि यह भी खबर आ रही है कि भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में मंगलवार, तीन दिसंबर को विधायक दल की बैठक होगी और...

  • ना सीएम तय हुआ, ना सरकार बनी

    मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा में तीन चौथाई बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां तीन दिन में सरकार नहीं बना पाईं। नतीजे आने के बाद तीन दिन की कवायद के बावजूद ना तो मुख्यमंत्री का नाम तय हो सका और ना ही सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस गतिरोध के बीच शिव सेना के नेता और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मिल कर उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा। इस मौके पर दोनों उप मुख्यमंत्री, देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार भी मौजूद थे। राज्यपाल ने नई सरकार के गठन...

  • शरद पवार कैसे जाएंगे राज्यसभा

    एनसीपी के संस्थापक और दिग्गज मराठा नेता शरद पवार ने चुनाव के दौरान राजनीति से संन्यास लेने की इच्छा जताई थी। लेकिन क्या सचमुच वे संन्यास लेने वाले हैं या उन्होंने चुनाव के बीच भावनात्मक कार्ड खेला था ताकि आखिरी चुनाव के नाम पर उनको वोट मिल सकें? इसका पता दो साल बाद चलेगा। शरद पवार अप्रैल 2026 में राज्यसभा से रिटायर होंगे। उनका छह साल का कार्यकाल खत्म होगा और इस बार उनकी पार्टी उनको राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं है। ऐसे में शरद पवार क्या करेंगे? क्या वे समूचे महा विकास अघाड़ी की एकजुटता बनाए रखते हुए...

  • आदित्य ठाकरे नेता चुने गए

    मुंबई। महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट की शिव सेना के विधायकों की बैठक हुई है। सोमवार को उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री में हुई बैठक में आदित्य ठाकरे को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में पार्टी का संयुक्त नेता चुना गया है। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव को शिव सेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) के विधायक दल का नेता और सुनील प्रभु को चीफ व्हिप चुना गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी अपने सभी विधायकों से शपथपत्र लेने पर विचार कर रही। है। पार्टी में हुई टूट...

  • पवार भतीजे के साथ जाएंगे या कांग्रेस के?

    सबसे बड़े मराठा क्षत्रप शरद पवार की राजनीति चौराहे पर है। उनको फैसला करना है कि आगे वे क्या करेंगे? वे पिछले चुनाव के बाद से ही 2024 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने उद्धव ठाकरे को भाजपा गठबंधन से निकाल कर कांग्रेस और एनसीपी की मदद से सरकार बनाने के लिए तैयार किया तो उनके दिमाग में 2024 का ही चुनाव था। वे एक बिल्कुल नए गठबंधन के साथ यह चुनाव लड़ना चाहते थे और ऐसी स्थिति हासिल करना चाहते थे, जिसमें वे अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना देते। चुनाव के बीच...

  • महाराष्ट्र में सब अपना अपना चुनाव लड़े

    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में छह पार्टियों ने दो गठबंधन बना कर चुनाव लड़े। ऊपर से ऐसा लग रहा था कि कितनी मेहनत करके इन पार्टियों ने गठबंधन बनाया है, कितनी मेहनत करके एक दूसरे के साथ तालमेल बैठाते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है और मेहनत करके एक दूसरे को जिताने की कोशिश कर रहे होंगे लेकिन हकीकत यह है कि सबने अपना अपना चुनाव लड़ा, सब अपने अपने वोट आधार के भरोसे रहे, किसी ने किसी की मदद नहीं की और कई जगह एक दूसरे से स्कोर सेटल करने का काम हुआ। यही कारण है कि कोई भी पूरे...

  • विनोद तावड़े का क्या होगा?

    Vinod Tawde: यह लाख टके का सवाल है कि भाजपा के महासचिव विनोद तावड़े का अब क्या होगा? इसके साथ ही यह भी सवाल है कि क्या वे किसी साजिश का शिकार हुए हैं? शिव सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने साजिश की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनके पास 18 लोगों की सूची थी, जो पैसे बांट रहे थे। उस सूची में तावड़े का नाम नहीं था। तभी राउत ने आश्चर्य जताया कि विनोद तावड़े जैसा बड़ा नेता कैसे खुद पैसे बांटने चला गया? आमतौर पर यह काम दूसरे लोग करते हैं। उम्मीदवार भी यह काम अपने...

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