kishori-yojna
गलती सिर्फ नेहरू की नहीं है!

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत सरकार की चीन नीति को लेकर सवाल उठाया तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पंडित नेहरू की गलतियां गिनाईं। उन्होंने राहुल से उनके परनाना की गलतियों पर सवाल किया।

नेहरू से आगे निकल गए आखिर मोदी!

जैसे अमेरिका के हर राष्ट्रपति की ख्वाहिश अब्राहम लिंकन बनने की होती है उसी तरह भारत के हर प्रधानमंत्री की इच्छा होती है कि वह पंडित जवाहर लाल नेहरू के जैसा हो जाए

कांग्रेस के आगे असल प्रश्न

फिलहाल, कांग्रेस में यथास्थिति यानी स्टेस-को कायम रहेगी। वो स्थिति जो पिछले साल आम चुनाव में पार्टी की लगातार दूसरी बार पराजय के बाद बनी थी। यानी फिलहाल पार्टी कार्यवाहक अध्यक्ष के नेतृत्व में ही काम करेगी।

जनसंघ के ‘हवाबाज’ ने रूकवाई नेहरू सीरिज

संघ परिवार के साथ मेरे अनुभव -3: मैं बड़ा प्रसन्न हुआ जब उस आरएसएस नेता ने, जिन से मैं कलकत्ते में मिला था और जो अब संगठन में बड़े ऊँचे पहुँच गए थे, मुझे आर्गेनाइजर में एक लेख-माला में नेहरू के विचार-तंत्र (आइडियोलॉजी) पर लिखने के लिए आमंत्रित किया।

मोदी को भी नेहरू जैसा धोखा!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सन 2020 की गर्मियों में क्या वैसा ही महसूस कर रहे हैं, जैसा अक्टूबर 1962 में तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने महसूस किया था? कहना मुश्किल है क्योंकि वक्त वैसा नहीं है

हिंदू उड़ा और मुसलमान पिंजरे में!

नंबर एक मसला, हिंदू-मुस्लिम-2: बूझें-सोचें आप कि सन 1947 में आजादी के बाद भारत का क्या आइडिया था? वह क्या विचार, क्या संकल्प था, जो नागरिकों के लिए था या जिसमें लोगों को ढलना था? भारत को बनना था? अपनी राय में पहला, मूल विचार यह बोध था कि अब हम आजाद हैं। मैं अब आजाद हूं। पुरानी बेड़ियों, अंधविश्वासों और गुलामी से मुक्ति। अब आधुनिक, विकसित होना है। आजादी के पंख से दिमाग-बुद्धि के खिड़की-दरवाजे खुलने हैं। ज्ञान, समझ, विवेक और सत्य में जीना है। इस भाव, इस विचार, इस आइडिया में पंडित नेहरू थे तो दूसरे नेता भी थे। ध्यान रहे 1947 की आजादी के वक्त कोई तीस करोड़ लोग थे। इसमें मुसलमानों की संख्या कोई साढ़े चार करोड़ थी। अब इस संख्या में इस सवाल पर जरा सोचें कि पंडित नेहरू ने 15 अगस्त की आधी रात में भारत का जो आइडिया दिया, सपना दिखाया तो उसे हिंदू ने कैसे लिया और मुसलमान ने कैसे लिया? अपना मानना है कि अगली सुबह जब हिंदू उठा तो वह आजाद पंछी माफिक उड़ता हुआ था। वक्त में उड़ने का जोश था जबकि मुसलमान की सुबह ठहरी, ठिठकी, रूकी हुई थी। वह इस चिंता में था कि कैसे वह रहेगा… Continue reading हिंदू उड़ा और मुसलमान पिंजरे में!

यह किसका देश है?

हिन्दूवादियों को गुमान है कि अब हिन्दू जग गए हैं। किन्तु ‘जग जाने’ का मतलब क्या है? अच्छे-अच्छे हिन्दू यहाँ अपने संवैधानिक रूप से दूसरे दर्जे, जनसांख्यकी राजनीति, घातक शैक्षिक वातावरण, आदि से परिचित तक नहीं हैं। बस, दशकों से चल रहे अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी उग्रवाद की प्रतिक्रिया में कुछ हलचल भर हुई है। किन्तु हिन्दू चेतना कुल मिलाकर दुर्बल अवस्था में है। उपनिषद वाली शास्त्रीय-ज्ञान परंपरा वाली चेतना हिन्दुओं में लुप्तप्राय हो चुकी। कर्मकांड, बाह्याचार, तीर्थ-पूजा में भीड़, आदि के बल से साम्राज्यवादी मतवादों का मुकाबला नहीं हो सकता। महान इतिहासकार सीताराम गोयल ने ‘भारत में इस्लामी साम्राज्यवाद की कहानी’ में बताया है कि अब केवल सच्चे इतिहास की जानकारी ही भारत में हिन्दुओं में धर्म-रक्षा चेतना का आधार बचा है। इसीलिए, हिन्दू-विरोधी मतवादियों ने इतिहास विकृति की परियोजना बनाई। पर हिन्दू नेताओं को इस की दूरगामी मार का आभास तक नहीं है! उस के सर्वोच्च शिक्षा-पदधारी वही विकृत इतिहास यथावत् पढ़ाने, और देश भर में फैलाने पर गर्व करते हैं। अतः मामला गंभीर है। हिन्दू नेता ठीक धर्म-रक्षा पर क्लूलेस हैं। नागरिकता संशोधन कानून, और उस पर विरोध सँभाल न पाना उसी का उदाहरण है। वे बनावटी बातें, व्यर्थ अनुष्ठान और काम करते रहे हैं जब कि मुसलमान अपने… Continue reading यह किसका देश है?

और लोड करें