एक देश एक परीक्षा- फूहड़ विचार!
आज शिक्षा में शिक्षक नहीं, बल्कि बाबू, ठेकेदार, एवं पार्टीबंदी महत्वपूर्ण हैं। अच्छा शासन करना नहीं, सारे चुनाव जीतना अधिक महत्वपूर्ण है। उसी तरह, जीवन में भी सच्चाई नहीं, आडंबर महत्वपूर्ण है। पढ़ाने-लिखाने, पत्रिकाओं-पुस्तकों, गोष्ठी सेमिनारों में भी सत्य नहीं, प्रोपेगंडा महत्वपूर्ण है। हर सामाजिक क्षेत्र में उपलब्धि नहीं, उस की भंगिमा, उल्टा-सीधा आँकड़ा बनाना महत्वपूर्ण है। विद्वत-जन नहीं, आईटी-सेल महत्वपूर्ण है। (बड़े नेता ने सत्ता मिलने पर यही आईटी सेल बनाए, जानकारों की सलाहकार समिति नहीं)। सार्वजनिक शिक्षा: गरीब की लुगाई-1 हाल में, कॉकरोच आंदोलन और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ी को लेकर...