One Nation One Exam

  • एक देश एक परीक्षा- फूहड़ विचार!

    आज शिक्षा में शिक्षक नहीं, बल्कि बाबू, ठेकेदार, एवं पार्टीबंदी महत्वपूर्ण हैं। अच्छा शासन करना नहीं, सारे चुनाव जीतना अधिक महत्वपूर्ण है। उसी तरह, जीवन में भी सच्चाई नहीं, आडंबर महत्वपूर्ण है। पढ़ाने-लिखाने, पत्रिकाओं-पुस्तकों, गोष्ठी सेमिनारों में भी सत्य नहीं, प्रोपेगंडा महत्वपूर्ण है। हर सामाजिक क्षेत्र में उपलब्धि नहीं, उस की भंगिमा, उल्टा-सीधा आँकड़ा बनाना महत्वपूर्ण है। विद्वत-जन नहीं, आईटी-सेल महत्वपूर्ण है। (बड़े नेता ने सत्ता मिलने पर यही आईटी सेल बनाए, जानकारों की सलाहकार समिति नहीं)। सार्वजनिक शिक्षा: गरीब की लुगाई-1 हाल में, कॉकरोच आंदोलन और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ी को लेकर...

  • एनटीए से कब छुटकारा मिलेगा?

    भारत सरकार ने पिछले कुछ दिनों से ऐसी प्रवृत्ति विकसित कर ली है वह किसी भी चीज को लेकर जज्बाती हो जा रही है। जैसे ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और सरकार चला रही भाजपा सभी जज्बाती हो जाते हैं। कोई भी उस पर सवाल उठा दे तो तुरंत सबकी भावनाएं आहत हो जाती हैं। जेईई मेन्स परीक्षा में गलत सवालों से छात्रों की परेशानी (एनटीए ) यही हाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए का है। मोदी सरकार ने इसका गठन एक देश, एक परीक्षा के सिद्धांत के तहत किया था। कहा गया था कि दाखिले और नौकरी...

  • एक देश एक परीक्षा में धोखे

    युवाओं के साथ धोखे का यह सिर्फ एक पहलू है। अगर केंद्र सरकार की बात करें तो ‘एक देश, एक कुछ भी’ की जिद में सरकार ने ‘एक देश, एक परीक्षा’ की घोषणा की थी। इसके लिए नेशनल टेस्टिस एजेंसी यानी एनटीए का गठन किया गया था। देश की सारी प्रवेश और प्रतियोगिता परीक्षाओं का जिम्मा इसी एजेंसी को दिया गया। जब एक के बाद एक परीक्षा में गड़बड़ियां होने लगीं तब इस एजेंसी की हकीकत सामने आई। पता चला कि इस एजेंसी के अधिकारियों और कर्मचारियों का अपना कोई काडर नहीं बना है। इधर उधर के विभागों से एक...