कॉमेडियन पराग कंसरा का 51 बर्ष की उम्र में निधन

मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Srivastava) के निधन के बाद ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ (Great Indian Laughter Challenge) फेम पराग कंसरा (Fame Parag Kansara) का 51 बर्ष की उम्र में निधन हो गया।

सीडीएस रावत का निधन: खराब मौसम और घने जंगल के कारण हादसा!

तमिलनाडु के कुन्नूर में एक बड़े हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई है।

वीआईपी पार्टी के विधायक मुसाफिर पासवान का निधन

बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के बोचाहा (सुरक्षित) से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के विधायक मुसाफिर पासवान का कल देर रात निधन हो गया।

कल्याण सिंह और मंडल बनाम कमंडल

आज अपने निधन के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी के लिए मंडल और कमंडल दोनों का प्रतीक हैं।

कल्याण सिंह का निधन, शोक में डूबा उत्तर प्रदेश

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh0 का लंबी बीमारी के बाद शनिवार देर शाम यहां संजय गांधी स्नातकोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया

ए.आई. रहमान और जोशी

इस हफ्ते मैंने अपने दो मित्र खो दिए। एक तो पाकिस्तान के श्री आई.ए. रहमान और दूसरे इंदौर के श्री महेश जोशी ! ये दोनों अपने ढंग के अनूठे लोग थे। दोनों ने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में नाम कमाया और ऐसा जीवन जिया, जिससे दूसरों को भी कुछ प्रेरणा मिले। श्री आई.ए. रहमान का पूरा नाम इब्न अब्दुर रहमान था। 90 वर्षीय रहमान साहब का जन्म हरियाणा में हुआ था और वे विभाजन के बाद पाकिस्तान में रहने लगे थे। वे विचारों से मार्क्सवादी थे लेकिन उनके स्वभाव में कट्टरपन नहीं था। इसीलिए पाकिस्तानी राजनीतिक दलों के सभी नेता उनका सम्मान करते थे। उन्होंने जिंदगीभर इंसानियत का झंडा बुलंद किया। 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में याह्याखान सरकार ने जुल्म ढाए तो उन्होंने उसके खिलाफ आवाज उठाई। जनरल अयूब और जनरल जिया-उल-हक के ज़माने में भी वे बराबर लोकतंत्र और मानवीय अधिकारों के लिए लड़ते रहे। जब जनरल ज़िया ने पाकिस्तानी अखबारों पर शिकंजा कसा तो उसके खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वालों में वे प्रमुख थे। फौजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था। उसी दौरान 1983 के आस-पास मेरी मुलाकात रहमान साहब और प्रसिद्ध बौद्धिक और जुल्फिकार अली भुट्टो के वित्त मंत्री रहे डा. मुबशर हसन से… Continue reading ए.आई. रहमान और जोशी

अहमद पटेल के बिना कांग्रेस!

जिस तरह से गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती है, कुछ कुछ उसी तरह से अहमद पटेल के बगैर भी कांग्रेस की कल्पना मुश्किल है।

‘अच्छे इंसान’ थे अहमद पटेल

वायरस से अहमद पटेल की मौत। वक्त कैसा अनुभव करा दे रहा हैं! क्या सोचू? मैं फरवरी से वायरस में बरबादी के पूर्वानुमान लिए हुए हूं और दस महिनों से सोचते हुए अब इस नतीजे पर हूं कि दुनिया का जो हो सो हो मगर भारत राष्ट्र-राज्य के लिए वायरस का महाकाल वह अनुभव होगा जो समकालीन इतिहास की विभाजक रेखा बनेगी

कोरोना से अहमद पटेल का निधन

कांग्रेस के संकटमोचक, पार्टी के वरिष्ठ नेता और सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी अहमद पटेल का बुधवार को निधन हो गया।

कुछ भी हो अमरसिंह थे अनोखे!

अमर सिंह के निधन की जब खबर पढ़ी तो अचानक मेरे मन में ‘न भूतो न भविष्यति’ उक्ति कौंध गई। मुझे लगा कि न तो उनके जैसा कोई व्यक्ति भारत तथा पूरी दुनिया ही नहीं इस पृथ्वी गृह पर पैदा हुआ और न ही भविष्य में पैदा होगा।

योगी सरकार की मंत्री का निधन

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस का संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा है और आम लोगों के साथ साथ खास लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

अजित जोगी की कुर्सी दास्ता

जब अजीत जोगी के इस दुनिया में न रहने की खबर पढ़ी तो बढ़ा अजीब सा लगा क्योंकि दिल्ली आने पर मैंने नेताओं के लिए जो राजनीतिबाज शब्द इस्तेमाल करना सीखा था वे उसकी प्रतिकृति कहे जा सकते थे।

हंसराज भारद्वाजः छोटे वकील, बड़े मंत्री!

कभी कांग्रेस की जानी-मानी हस्ती रहे हंसराज भारद्वाज के नहीं रहने की खबर पढ़ी तो पुरानी यादें ताजी हो आई। जब मैं कांग्रेस की रिपोर्टिंग करता था जब उनसे लगातार मुलाकात होती रहती थी। वे हम रिपोर्टरों के लिए तो मानों कांग्रेस की जानकारी का चलता-फिरता मीडिया थे। फिर उनसे अपने दिवंगत बुजुर्ग मित्र व कांग्रेसी नेता ब्रजमोहन के साथ यूनाइटेड कामन हाउस में अक्सर मुलाकातें होने लगी। हंसराज भारद्वाज कोजोड़-तोड़ में बेहद माहिर माना जाता था। वे पहले बंसीलाल व फिर उनके जरिए इंदिरा गांधी परिवार के संपर्क में आए व उनके निजी मुकदमें देखने लगे व बाद में उनके कानूनी सलाहकार बन गए। वे उस समय शाह कमीशन में चल रहे आपातकाल में इंदिरा गांधी के मामले देखते थे। इंदिरा गांधी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा व दिसंबर 1984 में राजीव गांधी ने उन्हें कानून मंत्री बनाया। इस पद पर वे दोबारा सरकार बनने पर भी बने रहे। देश के इतिहास में पहली बार बिना सांसद बने किसी व्यक्ति को मंत्री बनाया गया था। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली लागू करके सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति का नियम बदला। वे लगातार 27 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे। उन्होंने कभी कोई सीधा चुनाव नहीं लड़ा। वे राजीव गांधी के… Continue reading हंसराज भारद्वाजः छोटे वकील, बड़े मंत्री!

बौदि्धक उर्वरता में डीपीटी गजब नेता थे!

चाणक्य की भूमि बिहार की सीमा से सटे पूर्व उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर जिले में जन्मे देवीप्रसाद त्रिपाठी एक लाजवाब नेता थे। उनके निधन से देश ने एक ऐसा नेता खो दिया है जो न केवल बहुत अध्येता, बुद्धीमना था बल्कि कही कुछ भी कह सकने की हिम्मत रखता था। वे किशारावस्था से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। दिल्ली का जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय उनकी राजनीति की शुरूआती कर्मभूमि था । देवीप्रसाद त्रिपाठी उर्फ डीपीटी 1970 में जेएनयू आकर पढ़ने लगे और वामपंथी स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया में शामिल हो गए। वे अपनी सक्रियता व लोकप्रियता के कारण जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने। ध्यान रहे कि इस पद पर उनके पहले प्रकाश करात व उनकेबाद में सीताराम येचुरी भी बतौर अध्यक्ष रह। आपातकाल के दौरान वे इंदिरा गांधी के मुखर विरोधी होकर उनके खिलाफ काफी सक्रिय थे। 25 जून 1975 की आपातकाल की घोषणा होने के बाद उनकी तलाश में पुलिस ने जेएनयू पर छापा मारा। मगर वे फरार होकर बाराखंबा रोड पर अपने गांव के एक धोबी के घर में छुप गए। जब इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी हड़ताल के दौरान जेएनयू आयी तो उन्होंने उन्हें क्लास में न जाने को कहा। वे इससे काफी नाराज… Continue reading बौदि्धक उर्वरता में डीपीटी गजब नेता थे!

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