निमोनिया से विश्व भर में हर साल 20 लाख से अधिक बच्चों की मौत

दुनिया भर में निमोनिया से सर्वाधिक बच्चों की मौत होती है और हर साल इसकी चपेट में आने से 20 लाख से अधिक नौनिहाल काल के गाल में समा जाते हैं।

बच्चों में निमोनिया मौत का सबसे बड़ा कारण

देश में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आज भी निमोनिया मौत का सबसे प्रमुख कारण है और भारत में इस उम्र के बच्चों में इसकी दर 14.3 फीसदी है यानि प्रत्येक चार मिनट में एक बच्चे की मौत हो रही है।

न्यूमोनिया क्यों है जानलेवा?

बीते 13 नवंबर को को विश्व न्यूमोनिया दिवस मनाया गया तो इस बात पर रोशनी पड़ी कि ये बीमारी आज भी कितनी जानलेवा बनी हुई है। सामने आया कि बीते साल इस रोग के कारण आठ लाख शिशुओं की मौत हो गई। जाहिर है, निमोनिया को लेकर आम जन के स्तर पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। विश्व की स्वास्थ्य एजेंसियों की तरफ से दिए गए आंकड़ों का मतलब है कि पिछले साल हर 39 सेकेंड में एक बच्चे की मौत न्यूमोनिया के कारण हुई। जबकि हकीकत यह है कि न्यूमोनिया का इलाज संभव है। यानी इस बीमारी को रोका जा सकता है। अतः संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ), सेव द चिल्ड्रन समेत चार और स्वास्थ्य एजेंसियों ने सुझाव दिया है कि सरकारों से टीकाकरण में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ इस बीमारी के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। इन एजेंसियों ने विश्व न्यूमोनिया दिवस के मौके पर कथित रूप से “भुला दी गई बीमारी” नाम से एक रिपोर्ट जारी की। इन एजेंसियो ने कहा कि तथ्य यह है कि यह आसानी से रोके जाने वाली, इलाज और निदान वाली बीमारी है, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि छोटे बच्चों की जान लेने वाली… Continue reading न्यूमोनिया क्यों है जानलेवा?

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