ताकत हंसी में है गुस्से में नहीं!
आज के दौर में व्यंग्य का रूप बदल गया है। अब यह किताबों से निकलकर मीम, कार्टून और स्टैंड-अप कॉमेडी तक पहुँच गया है। सोशल मीडिया पर हर दिन नेताओं के बयानों को तोड़-मरोड़ कर ऐसे चुटकुले बनते हैं कि आम आदमी हँसते-हँसते लोटपोट हो जाए। मगर इन चुटकुलों के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा होता है। नेता जो जनता के सामने बड़े-बड़े वादे करते हैं, उनकी करनी और कथनी में काफ़ी अंतर होता है। (Kunal Kamra ) नेताओं पर व्यंग्य भारत विविधताओं का देश है, और विविधता में एक बात जो हर काल और हर कोने में समान...