‘पूजा मेरी जान’: मर्दों को ‘ना’ सुनना कब आएगा?
‘पूजा मेरी जान’ का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। और शायद इसी वजह से यह फ़िल्म अपने विषय के कारण आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है। यह एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है। यह दोस्ती, प्रेम, अस्वीकृति और जुनून की कहानी भी है। लेकिन इन तमाम परतों के नीचे इसकी असली कहानी पुरुष अहंकार और अस्वीकृति के बीच की उस खतरनाक दूरी की है, जिसे हमारा समाज अक्सर प्रेम समझने की भूल करता रहा है। सिने-सोहबत प्रेम में असफल होना एक निजी त्रासदी हो सकती है। लेकिन अस्वीकृति को स्वीकार न कर पाना जब अधिकार, बदला, हिंसा और...