सुर्खियां बनाम हकीकत

उज्ज्वला योजना में शामिल 37 फीसदी घरों को समय पर रीफिल की डिलीवरी नहीं मिलती। सिलिंडर की महंगाई एक और बड़ी वजह है। यह नहीं कहा जा सकता कि उज्ज्वला योजना का लाभ नहीं हुआ है। लेकिन यह साफ है कि यह उतना भी नहीं है, जितना सरकार दावा करती है।

अल्पसंख्यक समाज को आबादी से कई गुना ज्यादा लाभ मिला : योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी योजना में आप जाएंगे तो आप पाएंगे, आबादी के हिसाब से देखेंगे, तो अल्पसंख्यक समाज को उससे कई गुना ज्यादा लाभ मिल रहा है।

आबादीः सरकार क्यों डरे ?

पिछले साल भाजपा सांसद राकेश सिंहा ने संसद में एक विधेयक पेश किया और मांग की कि दो बच्चों का कानून बनाया जाए याने दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने को हतोत्साहित किया जाए।

आबादी को बढ़ने से रोकें

यदि भारत में जनसंख्या की रफ्तार जो आजकल है, वह बनी रही तो कुछ ही वर्षों में वह चीन को मात कर देगा। इस समय चीन से सिर्फ तीन-चार करोड़ लोग ही हमारे यहां कम हैं।

व्यापमी और बाजारू पाटों में पिसता देश का गौरव!

ज्यादा नहीं, सिर्फ बीस पच्चीस साल पहले तक, आरक्षण रूपी नासूर के बावजूद, सारे बड़े सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज अपने सटीक उपचार और समर्पित ज्ञानी चिकित्स्कों के लिए मशहूर थे।

जनसंख्या क़ानून आया तो क्या होगा?

भ्रष्ट मनमोहन सरकार से मुक्ति के लिए अन्ना हजारे ने सभी के हाथ में राष्ट्रीय ध्वज पकड़ा दिया था। जिस से देश में कांग्रेस के खिलाफ क्रान्ति की ज्वाला पैदा हुई और कांग्रेस भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार सब से निचले पायदान पर चली गई। कांग्रेस समर्थक वामपंथी दलों का पश्चिम बंगाल का किला तो पहले ही ढह गया था। उनकी ताकत सिर्फ जेएनयू में बची थी, वहीं से विचारधारा की लड़ाई नए सिरे से शुरू करने के लिए हताश कम्युनिस्टों ने युवाओं को आकर्षित करने वाला भूख-गरीबी-अशिक्षा से आज़ादी का नारा दिया। अपनी ताकत को बढाने के लिए वामपंथियों ने अपने साथ उन मुस्लिम युवकों को भी जोड़ लिया , जिनके दिमाग में भारत के खिलाफ जहर भरा था। नतीजतन आज़ादी का वह नारा बिगड़ कर कश्मीर की आज़ादी से होता हुआ , हिन्दुओं से आज़ादी तक जा पहुंचा| आज हालत यह है कि राष्ट्रवादी अन्ना हजारे का पकडाया राष्ट्रीय ध्वज और वामपंथी कन्हैया का दिया आज़ादी का नारा भारत के खिलाफ भारत की एकता तोड़ने के लिए इस्तेमाल हो रहा है| शाहीन बाग़ से एक नया वीडियो सामने आया है , जहां धरने पर बैठी औरतें कह रही हैं कि संसद और सुप्रीमकोर्ट हिन्दुओं के लिए… Continue reading जनसंख्या क़ानून आया तो क्या होगा?

जनगणना रजिस्टर क्या एनआरसी की स्क्रीप्ट?

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध से मोदी सरकार जरा भी विचलित नहीं है। नरेंद्र मोदी के रविवार के भाषण को कुछ पत्रकारों ने यह मान लिया कि वह एनआरसी से पीछे हट जाएंगे| मोदी ने अपने भाषण में ऐसा कोई संकेत नहीं दिया था| मोदी ने सिर्फ यह कहा था कि इस मुद्दे पर अभी विचार नहीं हुआ है| यह बात अमित शाह ने भी नहीं कही थी कि सरकार विचार करके फैसला कर चुकी है। उन्होंने लोकसभा में सिर्फ यह कहा था कि इस के बाद हम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर भी ला रहे हैं। यह सरकार के एजेंडे पर उसी दिन आ गया थाजब सत्रहवीं लोकसभा गठन के बाद राष्ट्रपति ने केन्द्रीय कक्ष में अपने पहले भाषण में यह बात कही थी| वह सरकार का नीतिगत भाषण है , और यही बात अमित शाह ने लोकसभा में कही हैलेकिन जब इस पर अमल शुरू करना होगा , उस समय सरकार की राजनीतिक मामलों की कमेटी इस पर विचार करेगी। जैसे मोदी ने कहा कि सरकार ने अभी इस पर विचार नहीं किया , वैसे ही अमित शाह ने मोदी से चार दिन पहले 18 दिसम्बर को मीडिया की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में यही कहा था। इस… Continue reading जनगणना रजिस्टर क्या एनआरसी की स्क्रीप्ट?

जनसंख्या रजिस्टर अपडेट होगा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी पर देश भर में चल रही बहस और विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर को अपडेट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 2021 में होने वाली जनगणना के बजट को भी मंजूरी दे दी है। एनपीआर को अपडेट करने का अगले साल होगा। यानी 2020 में जनसंख्या रजिस्टर अपडेट होगा और उसके अगले साल 2021 में जनगणना होगी। इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि एनपीआर के लिए किसी सबूत की जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने नागरिकों पर भरोसा है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। भारत की जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ रुपए के बजट की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने के लिए 3,941.35 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। इसकी जानकारी देते हुए सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि जनगणना के लिए कोई लंबा फार्म नहीं भरना होगा। यह स्वयं घोषित स्वरूप का होगा। इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं होगी और न ही… Continue reading जनसंख्या रजिस्टर अपडेट होगा

अनोखा गांव, जहां 97 साल से स्थिर है जनसंख्या!

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का धनोरा ऐसा गांव है, जहां की जनसंख्या वर्ष 1922 में 1,700 थी और आज भी इतनी ही है। यहां किसी भी परिवार में दो से ज्यादा बच्चे नहीं हैं।

मस्तमौला राजा और उदास प्रजा का देश

पिछले पांच साल में हम एक अजीबोग़रीब विरोधाभास के बीच से गुज़रे हैं। एक तरफ़ हमारे पास घनघोर ऊर्जा से लबालब ऐसा प्रधानमंत्री है, जिसने अपने देश का चप्पा-चप्पा नापने के साथ पूरी धरती का कोना-कोना भी छान मारा है।

और लोड करें