अब भी द्रोणागिरी पर्वत लाएंगे या नहीं राहुल?
सब नसीब की बातें हैं। एक देश है, एक संविधान है, सब के लिए एक नियम-क़ानून हैं, फिर भी अगर भोपाल और रांची में किसी का आसमानी सुल्तानी से सब-कुछ छिन जाता है और किसी को सब-कुछ मिल जाता है तो इसे आप नसीब का खेल नहीं मानेंगे तो और क्या मानेंगे? इसलिए देना है तो अपने ग्रह-नक्षत्रों को दोष दीजिए।....मुझे तो फ़िक्र यह हो रही है कि मीनाक्षी-प्रसंग के बाद भी अगर राहुल विक्रम-बजरंगी नहीं बने तो कांग्रेस वह द्रोणागिरी पर्वत कहां से लाएगी, जिस की खोह में उस की संजीवनी छिपी हुई है? मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के...