Regional Parties

  • प्रादेशिक पार्टियों का बेहतर संगठन

    भाजपा को न सिर्फ वंशवादी पार्टियों से लड़ने में मुश्किल होती है, बल्कि प्रादेशिक पार्टियों से भी लड़ना उसके लिए आसान नहीं होता है। भले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंशवादी और प्रादेशिक पार्टियों की कितनी भी आलोचना करें और उनको लोकतंत्र के लिए खतरा बताएं लेकिन उनसे वे उस तरह से नहीं लड़ पाते हैं, जैसे कांग्रेस से लड़ते हैं। ज्यादातर वंशवादी और प्रादेशिक पार्टियों ने अलग अलग राज्यों में भाजपा को हराया है या भाजपा ने उनके हराने के लिए किसी दूसरी वंशवादी या प्रादेशिक पार्टी का सहारा लिया है। सोचें, यह कैसी हिप्पोक्रेसी है कि आप बिहार में लालू...

  • क्षेत्रीय दलों के सामने भाजपा की चुनौती

    भारतीय जनता पार्टी के ऊपर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के संपूर्ण नियंत्रण के एक दशक से कुछ ज्यादा समय बीते हैं। इस अवधि में कई राजनीतिक बदलाव हुए और कई नई राजनीतिक धारणाएं बनीं। उन्हीं में से एक धारणा यह है कि भाजपा के लिए कांग्रेस को हराना बहुत आसान है यानी जहां उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस से होता है वहां वह आसानी से जीत जाती है। इस धारणा के समर्थन में बहुत तर्क या तथ्य पेश करने की जरुरत नहीं है। एक दूसरी धारणा यह है कि प्रादेशिक पार्टियों के साथ लड़ना भाजपा के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण है।...

  • संसद में प्रादेशिक पार्टियों का एजेंडा

    संसद का बजट सत्र शुरू हुआ था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कई साल के बाद यह पहला ऐसा सत्र है, जिससे पहले कोई विवादित मुद्दा नहीं आया है। असल में उससे पहले हर सत्र शुरू होने से थोड़े दिन पहले कोई न कोई खुलासा हो जाता था। कभी किसी कंपनी द्वारा शेयर बाजार में गड़बड़ी का तो कभी शेयर बाजार की नियामक की प्रमुख की गड़बड़ियों का तो कभी चीनी घुसपैठ या चीनी सैनिकों के साथ झड़प की। उसके बाद पूरा सत्र उसी पर विवाद में निकल जाता था। बरसों बाद सचमुच ऐसा कोई मुद्दा नहीं...

  • कई प्रादेशिक पार्टियों के अस्तित्व पर खतरा

    इस बार लोकसभा चुनाव के नतीजे कई प्रादेशिक पार्टियों के लिए खतरे की घंटी हैं। कई राज्यों में मजबूत रहीं प्रादेशिक पार्टियों का अस्तित्व खतरे में दिख रहा है। ऐसा चुनाव हारने की वजह से नहीं है। ध्यान रहे एक या दो चुनाव में हार जाने से पार्टियां समाप्त नहीं हो जाती हैं। ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जब पार्टियों ने मजबूत वापसी की है। आंध्र प्रदेश में ही लोकसभा की तीन और विधानसभा की 22 सीट पर सिमट गई चंद्रबाबू नायडू की पार्टी इस बार लोकसभा में 16 और विधानसभा में 135 सीट जीत कर आई है। लोकसभा में जीरो...

  • पार्टियों के उत्तराधिकार का मसला उलझा

    इस बार लोकसभा चुनाव और उसके साथ हुए विधानसभा चुनावों में ऐसा लग रहा था कि कई पार्टियों के उत्तराधिकार का मसला सुलझ जाएगा। बड़े और रिटायर होने की कगार पर पहुंचे नेता अपना उत्तराधिकारी तय कर देंगे। लेकिन एक तेलुगू देशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू को छोड़ कर किसी पार्टी में उत्तराधिकारी तय नहीं हुआ। उलटे कई पार्टियों में उत्तराधिकार का मामला उलझ गया। जिन प्रादेशिक पार्टियों में उत्तराधिकार का मामला उलझा है उनमें नीतीश कुमार की जनता दल यू, मायावती की बहुजन समाज पार्टी, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और के चंद्रशेखर राव की बीआरएस है। ममता...

  • मोदी सुनामी क्षत्रपों से फुस्स!

    गुजरे सप्ताह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की क्षत्रपता स्थापित हुई। पिछले सप्ताह भी मैंने लिखा था कि राहुल गांधी और शरद पवार ठीक कर रहे हैं, जो उद्धव ठाकरे को बड़ा भाई बना रहे हैं। अब सीटों के बंटवारे (ठाकरे पार्टी को 21, कांग्रेस 17, शरद पवार पार्टी 10 सीट) ने भी महाराष्ट्र की जनता की निगाह में उद्धव ठाकरे बनाम नरेंद्र मोदी की सीधी प्रतिद्वंद्विता बना दी है। इसका अर्थ है लोगों में, समर्थकों में एकनाथ शिंदे और अजित पवार की वोट दुकान खत्म। इनकी वही दशा होनी है जो बिहार में भाजपा के पार्टनर नीतीश, मांझी, पासवान आदि...

  • प्रादेशिक पार्टियां भी हकीकत समझें!

    पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के चार राज्यों में हारने के बाद प्रादेशिक पार्टियों खास कर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों ने म्यान से तलवारें निकाल ली हैं। समाजवादी पार्टी से लेकर जनता दल यू और सीपीएम से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक सब कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। बिना आंकड़ा देख सब यह ज्ञान दे रहे हैं कि अगर ‘इंडिया’ एकजुट होकर लड़ता तो कांग्रेस इस तरह से नहीं हारती। हालांकि यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। कांग्रेस के ऊपर सबसे ज्यादा हमलावर ममता बनर्जी हैं, जिन्होंने कांग्रेस पर तीखा बयान दिया और अब उनकी...

  • क्षेत्रीय पार्टियां क्या खत्म हो सकती हैं?

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्षेत्रीय पार्टियों का क्या भविष्य होगा? क्या वे खत्म हो जाएंगी या अब ऐसा समय आ गया है कि और ज्यादा मजबूत होंगी? जेपी नड्डा पांच अक्टूबर को पटना गए थे, जहां उन्होंने कैलाशपति मिश्र की सौवीं जयंती के कार्यक्रम में कहा कि क्षेत्रीय पार्टियां परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती हैं इसलिए ये खत्म हो जाएंगी। इससे ठीक 14 महीने पहले 31 जुलाई 2022 को भी पटना में ही जेपी नड्डा ने यह बात कही थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा अपनी विचारधारा...

  • क्षेत्रीय पार्टियों की राष्ट्रीय चुनौती

    अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए कमर कस रही पार्टियों में से लगभग सभी पार्टियां क्षेत्रीय हैं। यह एक स्तर पर उनकी ताकत है तो दूसरे स्तर पर कमजोरी भी है। उनकी ताकत यह है कि लगभग सभी क्षेत्रीय पार्टियों के पास दमदार नेता हैं, जो 24 घंटे राजनीति करते हैं। सभी प्रादेशिक पार्टियों के पास एक मजबूत सामाजिक समीकरण यानी वोट का एक आधार है और अपने अपने राज्य में उनके पास अच्छा खासा सांगठनिक ढांचा है। अपने राज्य में राजनीति करने के लिए उनके पास...

  • मजबूत हो रही हैं क्षेत्रीय पार्टियां

    पिछले दिनों दो क्षेत्रीय पार्टियों ने अपनी स्थापना की रजत जयंती मनाई। ओड़िशा में बीजू जनता दल ने स्थापना के 25 साल पूरे किए हैं तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 25 साल पूरे हुए हैं। बीजू जनता दल ने 26 दिसंबर 2022 को श्रीजगन्नाथ धाम में पार्टी की स्थापना की रजत जयंती मनाई और इस मौके पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियों ने ओड़िशा के विकास की अनदेखी की। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अगर राज्य की महिलाओं का आशीर्वाद मिला तो बीजू जनता दल अगले एक सौ साल तक राज्य के लोगों...

  • क्षेत्रीय पार्टियों को भी कांग्रेस से ज्यादा चंदा

    कांग्रेस की स्थिति सिर्फ चुनावी राजनीति में भी फिसड्डी नहीं हो गई है, बल्कि चुनावी चंदे के मामले में भी उसकी स्थिति बहुत खराब है। भाजपा को मिलने वाले चंदे में तो वह कहीं टिकती नहीं है लेकिन क्षेत्रीय पार्टियां भी उससे आगे निकल गई हैं। यह स्थिति तब है, जब तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। पिछले साल भी कांग्रेस की दो राज्यों में सरकार थी और उस समय के आंकड़ों में भी कई प्रादेशिक पार्टियां कांग्रेस से आगे रही हैं। भाजपा की तो स्थिति यह है कि इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए चंदे में 72 फीसदी चंदा अकेले...

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