धार्मिक मान्यताओं में दखल देने के खतरे

सर्वोच्च अदालत ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की मंजूरी के अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया है। अदालत ने तमाम पुनर्विचार याचिकाओं को सात जजों की बड़ी बेंच के पास भेजा है।

सबरीमला मंदिर में भक्तों की उमड़ी भारी भीड़

केरल में सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन के लिए आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दो महीने तक चलने वाली वार्षिक तीर्थयात्रा ‘मंडल-मकरविलक्कू’ का आज दूसरा दिन है।

सबरीमला: अंधविश्वास से उबरें

सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल की औरतें अंदर जा सकती हैं या नहीं, इस मुद्दे पर अब सर्वोच्च न्यायालय के 7 जजों कीपीठ अपना फैसला देगी। पिछले साल पांच जजों की बेंच ने औरतों के प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के खिलाफ बहुत से धार्मिक संगठनों और मौकापरस्त राजनीतिक दलों ने भी आवाज उठाई थी।

सबरीमाला के कपाट खुले, महिलाओं को रोका

मंदिर के महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से चर्चा में आए केरल स्थित सबरीमाला मंदिर के कपाट शनिवार को मंडल पूजा उत्सव के लिए खोले गए।

सबरीमाला केस सात जजों की बेंच को

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाएं अब सात जजों की बेंच सुनेगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने तीन-दो के बहुमत से इस मामले को सात जजों की बेंच के पास भेजने का फैसला किया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अंतिम फैसला आने तक उसका पिछला फैसला लागू रहेगा। यानी महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक नहीं रहेगी। इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने 28 सितंबर 2018 को चार-एक के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी। फैसले पर 56 पुनर्विचार सहित 65 याचिकाएं दायर की गई थीं। इन पर छह फरवरी को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पुनर्विचार याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। इनमें से चीफ जस्टिस, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने केस बड़ी बेंच को भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस रोहिंटन नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसके खिलाफ फैसला दिया। पुनर्विचार याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- यह याचिका दायर करने वाले का मकसद धर्म और आस्था पर वाद विवाद शुरू… Continue reading सबरीमाला केस सात जजों की बेंच को

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर कानून संभव नहीं : विजयन

तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोमवार को कहा कि सबरीमला के अयप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटने के लिए कोई कानून लाना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है। विजयन ने विधानसभा में विपक्षी यूडीएफ के एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि शीर्ष अदालत का 28 सितंबर, 2018 का फैसला जल्लीकट्टू या बैलगाड़ी दौड़ से संबंधित फैसले जैसा नहीं है। उन्होंने कहा सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित उच्चतम न्यायालय का फैसला मौलिक अधिकारों से जुड़ा फैसला है। राज्य सरकार शीर्ष अदालत का फैसला लागू करने के लिए बाध्य है। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सितंबर में सबरीमला के अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं द्वारा पूजा करने पर लगी रोक हटा ली थी और इस तरह उसने इस मंदिर में उनके प्रवेश का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के 28 सितंबर, 2018 के इस फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दायर की गयी है और उस पर इसी माह उसका आदेश आने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजस्वला आयुवर्ग की महिलाओं को (मंदिर में) प्रवेश करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन… Continue reading सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर कानून संभव नहीं : विजयन

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