Shri Krishna Janmashtami

  • श्रीकृष्ण, करूक्षेत्र और प्रबंधन

    महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भों से यह अकाट्य रूप से सिद्ध होता है कि श्रीकृष्ण द्वारा संचालित कुरुक्षेत्र मैनेजमेंट का प्रत्येक अध्याय आधुनिक जीवन और कॉर्पोरेट जगत के संकटों का अचूक समाधान है। दुर्योधन का प्रबंधन अहंकार, अति आत्मविश्वास और केंद्रीकृत सत्ता का था, जिसका परिणाम विनाश हुआ। इसके विपरीत, श्रीकृष्ण का प्रबंधन विकेंद्रीकृत, नैतिक, रणनीतिक और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत था। भारतीय वांग्मय के अमर प्रदाता, योगेश्वर श्रीकृष्ण का चरित्र केवल आध्यात्मिक चेतना का पुंज नहीं, अपितु व्यावहारिक जीवन दर्शन, कूटनीतिक कौशल और का शाश्वत स्रोत भी है। आज का वैश्विक परिदृश्य जिस तीव्र अनिश्चितता, अनपेक्षित जटिलता और मानसिक...

  • कृष्ण नीति में धर्म-बोध और शौर्य-बोध

    कृष्ण की विशेषता यह है कि वे धर्म को अंधे आग्रह के रूप में नहीं देखते। उनके निर्णयों में परिस्थिति की समझ, समय की पहचान और परिणामों का आकलन दिखाई देता है। यही उनकी नीति को विशिष्ट बनाता है। महाभारत में कृष्ण ने युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा। उन्होंने पहले शांति का प्रयास किया। पांडवों के लिए न्यूनतम अधिकार तक स्वीकार करने की बात सामने रखी गई श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष अजीत दुबे भारतीय चिंतन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व जितना विराट है, उतना ही बहुआयामी भी। वे एक ओर प्रेम, करुणा और लोकमंगल के...