Shri Ram

  • श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?

    श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व सर्वांगीण है। वे सफल राजनीतिज्ञ, कुशल कूटनीतिज्ञ, गहन विचारक और दार्शनिक के रूप में सदैव प्रतिष्ठित रहेंगे। इस बहुआयामी स्वरूप के पीछे उनकी दिव्य चेतना और शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानवीय मर्यादाओं से संचालित है। वे हर परिस्थिति का सामना एक सामान्य मनुष्य की तरह करते हैं और उसी सीमाओं के भीतर उसका समाधान भी ढूंढते हैं। 26 मार्च को देश-दुनिया में रामनवमी बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गई। हिंदू परंपरा में श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण त्रेतायुग में हुआ। महर्षि वाल्मीकि प्रणीत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास...

  • श्रीराम का मर्यादित जीवन

    श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का वह दर्पण है जिसमें मर्यादा शब्द को जीवंत रूप दिया गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है।...