समाज की उलटी दिशा

बारिश करवाने के लिए कम से कम छह नाबालिग लड़कियों को निर्वस्त्र कर गांव में वहां घुमाया गया। मीडिया रिपोर्टों से साफ है कि इस रिवाज को गांव के सभी लोगों की सामूहिक स्वीकृति थी।

अमित शाह ने कोलकाता में स्वामी विवेकानंद को दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कोलकाता में स्वामी विवेकानंद के पैतृक निवास पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह पश्चिम बंगाल में राज्य विधानसभा चुनावों से पहले स्थिति का जायजा लेने के लिए दो दिवसीय दौरे पर आए हैं।

केजरीवाल ने किया बुद्ध और स्वामी विवेकानंद का स्मरण

भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, धर्म चक्र दिवस के रूप में आषाढ़ पूर्णिमा मना रहा है।

स्वामी विवेकानन्दः मूर्ति लगाना छोड़ उनकी सीख पर चलें!

 स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा तो अभी तक जेएनयू में स्थापित न हो पाई, पर ढँकी प्रतिमा के अपमान की खबर दुनिया भर में जरूर गई। इस का दोष क्या उन कम्युनिस्टों का ही है, जिनका आज भी जेएनयू में दबदबा है? कुछ पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में भी रातो-रात वीर सावरकर की प्रतिमा लगाकर उस का अपमान कराया जा चुका था। विवेकानन्द और सावरकर जैसे पुरुष-सिंहों की प्रतिमाएं इस तरह चुप-चाप लगाने की कोशिश भी दोषी है। जिन में इतनी बुद्धि औऱ साहस नहीं कि इन मनीषियों की शिक्षा पर चल सकें, वे दिखावे से काम चलाना चाहते हैं। इसलिए भी विवेकानन्द का जेएनयू में, और सावरकर का डीयू में अपमान हुआ। जब तक पहले पार्टी-राजनीति चमकाने की चाह रहेगी, तब तक विवेकानन्द की प्रतिमा लगाना निरर्थक भी है।सोचें, जेएनयू में पचास साल से मार्क्स-लेनिन-माओ का दबदबा है। क्या वहाँ इन नेताओं की कोई मूर्ति लगी थी? मार्क्स-लेनिन के विचार, विश्वास, साहित्य, मानसिकता और तदाधारित गतिविधियाँ जेएनयू में चलायी गयी। पूरी निष्ठा, आत्मविश्वास, और ताल-मेल से। तभी वहाँ कम्युनिस्ट अड्डा ऐसा बना।  तुलना में हिन्दू राष्ट्रवादियों ने दशकों से राज्यों, व बरसों केंद्र की सत्ता पाकर क्या किया? वे विवेकानन्द की अनेक अनमोल सीखों में एक पर भी नहीं चले। अधिकांश… Continue reading स्वामी विवेकानन्दः मूर्ति लगाना छोड़ उनकी सीख पर चलें!

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक: खट्टर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

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