तालिबानी अब हमारे सखा है!
कुछ दिनों से भारत में एक ही ख़बर है! और वह एक तालिबानी के दौरे की है। बाक़ी सब कुछ, चाहे बिहार चुनाव हो, सीट बँटवारे की जोड़-बाकि, या ग़ाज़ा में युद्धविराम की खबर, सब साइडलाइन पर खिसक गए हैं। दिल्ली का फोकस केवल तालिबान पर केंद्रित है। और यह सिर्फ़ जिज्ञासा नहीं है। हाँ, उन्हें चलते, बोलते, कैमरे के सामने सहज होते देखना एक तमाशे जैसा है, लेकिन तालिबान प्रतिनिधिमंडल खुद भी जानता है कि यह ध्यान उनके काम आता है। भारत में यह उनका मौका है — दिखने, सुने जाने और शायद थोड़ा घूमने-फिरने का भी। इस पूरे...