मां से दूध देेने के लिए जिद्द कर रहा था 3 साल का मासूम, गुस्से में पटक कर ले ली जान…

महिला ने अपने 3 साल के मासूम बेटे को पटक कर मार दिया. मां ने बेटे को इतनी जोर से पटका की मौके पर ही उसकी मौत हो गई….

Mirzapur : PUBG खेलने से रोक रही थी चाची, बच्चे ने लोहे की रॉड से कर दिया हमला…

ऑनलाइन क्लासेज के बाद भी बचे मोबाइल में लगे रहते थे. बच्चे ज्यादातर फोन में गेम खेलते थे और हाल के दिनों में PUBG का इंडियन वर्सन VG MI काफी लोकप्रिय हुआ है…..

अजब-गजब : जुड़वा बच्चों के जन्म पर खुश था बाप, फिर DNA रिपोर्ट में पता चला कि बच्चों का बाप एक नहीं 2 हैं…

DNA रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ कि दोनों जुड़वा बच्चों के पिता एक नहीं बल्कि 2 थे. जैसे ही इस बात की जानकारी पति को हुई तो पहले तो उसे इस बात का विश्वास ही नहीं हुआ. लेकिन बाद में जब डॉक्टर ने उसे

थाने में ही सनकी पति रेतने लगा पत्नी का गला, पुलिसकर्मी भी रह गये हैरान..

पति के उठाए गए अचानक इस कदम को देखने के बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी चकित रह गए. हालत गंभीर देखते हुए कुछ पुलिसकर्मी बीच बचाव के लिए आगे आए और दोनों को अलग कर दिया

​Rajashtan CM Health Update : शिवालयों में ‘महामृत्युंजय यज्ञ’, दरगाह में ‘जियारत’ और गिरजाघऱ में रविवार को होगा प्रार्थनासभा का आयोजन, जानें अब कैसे हैं CM Gehlot…

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और शिक्षा मंत्री रघु शर्मा भी SMS भी मौजूद रहे. जानकारी के अनुसार एंजियो प्लास्टी के बाद 24 घंटे तक मुख्यमंत्री को अस्पताल में ऑब्जर्वेशन में रखा ज

कलंकित हुई ममता : प्रेमी के साथ मिलकर अपने 3 साल के बेटे को दूध में जहर डालकर दिया…

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हो गया कि बच्चे की मौत का कारण तेज बुखार नहीं बल्कि जहर था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि मरने के कुछ देर पहले ही बच्चे ने दूध और बिस्किट खाए थे जिसमें जहर मिला हुआ था.

गर्भधारण के केवल 25 हफ्ते बाद ही पैदा हुई दुनिया की सबसे छोटी बच्ची, अब 13 महीने के बाद आई माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान

अक्सर हम देखते है की जन्म के उचित समय से पहले पैदा हुए बच्चे ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाते पर दुनिया के सबसे छोटे बच्चे को अब 13 महीने अस्पताल में बिताने के बाद घर भेज दिया गया है। जन्म के समय इस बच्ची का वजन महज 212 ग्राम था।

क्या है डाउन सिन्ड्रोम बीमारी?

डाउन सिंड्रोम के साथ जन्मे बच्चे और उनके माता-पिता बहुत कठिन जीवन बिताते हैं, ऐसे में डाउन सिंड्रोम की सम्भावना समाप्त करने के लिये जरूरी है कि लोगों में इस बाबत जागरूकता बढ़े विशेषरूप से उन जोड़ों में जो पहली बार माता-पिता बनने जा रहे हैं।

राहत की खबर! कोरोना के बढ़ते हुए मामलों में इस राज्य का एक जिला हुआ कोरोना फ्री, पॉजिटिविटी रेट जीरो

महाराष्ट्र में भी कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन जहां बुरी खबरें आ रही है वहीं अच्छी खबर भी है। महाराष्ट्र में ही एक जिला कोरोना मुक्त हुआ है जिसका नाम है भंडारा। बीते शुक्रवार को जिले का आखिरी मरीज को भी डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके अलावा शुक्रवार को हुई जांच में कोरोना को कोई नया मरीज सामने नहीं आया है।

UP Block Pramukh Elections : नामांकन के दौरान कई जिलों में बवाल,सीतापुर में हुई फायरिंग में 4 घायल

लखनऊ | UP Block Pramukh Elections :  उत्तर प्रदेश में ब्लाक प्रमुख के चुनाव के पहले ही जबरदस्त हिंसा की खबर आ रही है. जानकारी के अनुसार नामांकन दाखिल करने के क्रम में यूपी के अलग-अलग जिलों में जमकर हंगामा हो रहा है. उत्तर प्रदेश के सीतापुर ,श्रावस्ती, अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में हिंसक झड़प और हाथापाई यहां तक की फायरिंग तक की खबरें आ रही हैं. अब तक मिली जानकारी के अनुसार सीतापुर में फायरिंग की गई है जिसमें 3 लोग घायल हो गए हैं. बताया जा रहा है कि नामांकन पत्र को लेकर दो पक्षों में आपसी कहासुनी हो गई थी इसके बाद बवाल हो गया. पुलिस मौके पर पहुंच गई है लेकिन अब तक कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है. बताया जा रहा है कि सीतापुर की फायरिंग में 3 लोग घायल हो गए हैं जिन्हें लखनऊ इलाज के लिए ले जाया गया है. सीतापुर के कसमंडा में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के लिये नामांकन के दौरान भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच पुलिस के सामने हुई दर्जनों राउंड फायरिंग। घटना में एक युवक समेत 3 लोग गंभीर रूप से ज़ख़्मी हैं। गुस्साए समर्थकों ने नेशनल हाईवे-24 भी जाम किया।#PanchayatChunavUpdateUPTak pic.twitter.com/xWqHsZU7dG — UP Tak… Continue reading UP Block Pramukh Elections : नामांकन के दौरान कई जिलों में बवाल,सीतापुर में हुई फायरिंग में 4 घायल

सदमें से मनोदशा की बीमारी (पीटीएसडी)

इसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है। यह वास्तव में खतरनाक घटनाओं (थ्रेटनिंग इवेंट) के सम्पर्क में आने के बाद दिमाग में रासायनिक और न्यूरोनल परिवर्तनों की प्रतिक्रिया से होता है। ज्यादातर लोगों पर ऐसी घटनाओं का असर नहीं होता लेकिन कुछ में ये दिमागी परिवर्तन कर देती हैं जिससे वे पीटीएसडी से ग्रस्त हो जाते हैं। सन 2018 में हुए एक शोध के मुताबिक ऐसे लोगों में स्ट्रेस से जुड़े हारमोन्स के स्तर में परिवर्तन होने से वे ओवररियेक्टिव फाइट ऑर फ्लाइट रिस्पांस की भावना से भर जाते हैं। पीटीएसडी पीड़ित होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति में दिमागी या शारीरिक तौर पर कमजोरी आ गयी है। पीटीएसडी यानी किसी दर्दनाक घटना से लगा सदमा। ऐसे सदमे की वजह एक्सीडेंट, अपने की मृत्यु, प्राकृतिक आपदा (भूकम्प, सुनामी, तूफान इत्यादि), फिजिकल या सेक्सुअल हमला या मिलिटरी कॉम्बेट जैसी घटनायें होती हैं। इससे ग्रस्त लोगों में खतरे की बढ़ी हुई भावना की वजह से फाइट या फ्लाइट रिस्पांस बहुत तीव्र हो जाता है। पीटीएसडी पीड़ित सुरक्षित होने पर भी तनावग्रस्त या भयभीत महसूस करते हैं। युद्ध में भाग ले चुके सैनिक अक्सर इस मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं और इनके संदर्भ में पीटीएसडी को… Continue reading सदमें से मनोदशा की बीमारी (पीटीएसडी)

दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी!

देश में पहली बार दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक का प्रयोग डा. गौरव गोयल की देखरेख में हुआ।.. इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी के क्षेत्र में ऐसी क्रांति आयी है कि पहले जो ऑपरेशन 8 से 10 घंटे में सफलता की 30 प्रतिशत उम्मीद से किये जाते थे अब उन्हें 99 प्रतिशत सफलता के साथ 1 घंटे में किया जाता है वह भी बिना चीर-फाड़ के। यह भी पढ़ें: वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स treatment brain stroke : दिमाग में क्लॉट हो, नस फट जाये (हेमरेज) या ब्रेन ट्यूमर हो  तो  क्या आप सोच सकते हैं कि बिना चीर-फाड़ किये इन्हें ठीक किया जा सकता है? लेकिन अब ये सम्भव है और ऐसा हुआ है ब्रेन सर्जरी की नयी तकनीक न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी से। इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी के क्षेत्र में ऐसी क्रांति आयी है कि पहले जो ऑपरेशन 8 से 10 घंटे में सफलता की 30 प्रतिशत उम्मीद से किये जाते थे अब उन्हें 99 प्रतिशत सफलता के साथ 1 घंटे में किया जाता है वह भी बिना चीर-फाड़ के। इस तकनीक से ब्रेन सर्जरी करने वाले देश के चोटी के डाक्टरों में शुमार डा. गौरव गोयल (डायरेक्टर एंव हैड इंस्टीट्यूट… Continue reading दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी!

डॉक्टरों ने बेटे के शव को पैक कर दे दिया मां-बाप को, फिर मां ने रो-रो कर शव को हिलाते हुुए कहा वापस आ जाओ और लौट आया लाल …

बहादुरगढ़ | कई बार देखा जाता है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण चमत्कार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. ऐसा ही एक मामला हरियाणा के बहादुरगढ़ से सामने आया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली के एक अस्पताल में जिस बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया था उसे जब वापस अपने गांव लेकर आया गया तो उसकी सांसे फिर से चलने लगी. ये देखकर परिवार वाले हड़बड़ा गए और अफरातफरी में रोहतक के एक अस्पताल में उसे भर्ती किया गया. सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि वह बच्चा कुछ दिनों तक इलाज चलने के बाद स्वस्थ होकर अपने घर भी लौट आया. परिवार वालों का कहना है कि वह दिल्ली के डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज करेंगे. टाइफाइड की हुई थी शिकायत यह पूरा मामला बहादुरगढ़ में रहने वाले कुणाल शर्मा का है. कुणाल को टाइफाइड की शिकायत हुई थी जिसके बाद उसे इलाज के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती किया गया था. लेकिन दिल्ली के अस्पताल डॉक्टरों ने कुणाल के शव को पैक कर मां बाप के हवाले कर दिया. अपने बच्चे के शव को लेने के बाद से मां का रो रो कर बुरा हाल हो गया. स्थिति यह थी कि… Continue reading डॉक्टरों ने बेटे के शव को पैक कर दे दिया मां-बाप को, फिर मां ने रो-रो कर शव को हिलाते हुुए कहा वापस आ जाओ और लौट आया लाल …

क्या होता है लेप्टोस्पायरोसिस..मायानगरी पर क्यो छाया इसका साया, जानें इसके लक्षण और उपचार

मुंबई: महाराष्ट्र के मुंबई में कोरोना ने अपना बेइंतहा कहर बरसाया है। कोरोना के बाद बारिश ने मुंबई को खूब भिगोया है। कई निचले इलाके वाले मकानों में पानी भर जाने से उनको समस्या का सामना करना पड़ा। मानसून के आगमन पर मायानगरी पर खतरा मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में बृह्न्मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने गुरुवार को लेप्टोस्पायरोसिस को लेकर परामर्श जारी किया है।मौसम विभाग ने मायानगरी में भयंकर बारिश के आसार बताये है। अनुमान लगाया है कि मुंबई में मूसलाधार बारिश हो सकती है। नगर निगम ने लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों के बढ़ने की चेतावनी जारी की है। लोग अगर पानी में उतरते हैं, या सड़कों भरे पानी में बगैर गम बूट पहने चलते हैं तो ऐसे लोगों को संक्रमण का ज्यादा खतरा है। अगर कोई जिसके पैरों में या शरीर के किसी हिस्से में चोट लगी हुई है और वो रुके हुए पानी में चलता है तो उसे लेप्टोस्पायरोसिस का मध्यम खतरा है। यह बारिश के पानी से होने वाला एक प्रकार का संक्रमण होता है। होता क्या है लेप्टोस्पायरोसिस ये एक तरह का दुर्लभ बैक्टीरियल संक्रमण होता है, लेप्टोस्पायरोसिस की बीमारी इंसानों में जानवरों के जरिये फैलता है, ऐसा तब होता है जब शरीर में… Continue reading क्या होता है लेप्टोस्पायरोसिस..मायानगरी पर क्यो छाया इसका साया, जानें इसके लक्षण और उपचार

जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर

Health Desk | देश के दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधायें न होने से कोरोना टेस्टिंग उस स्तर पर नहीं हो पा रही है जिसकी जरूरत है, ऐसे में कोरोना संक्रमण से होने वाले बुखार का इलाज झोला छाप डाक्टर टाइफॉयड समझकर करते हैं जिसका परिणाम सैकड़ों की संख्या में हुयी मौतों के रूप में सामने आया है और आता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोगों को इन दोनों बीमारियों के लक्षणों का अंतर पता हो ताकि वे जानलेवा स्थिति से बच सकें। टाइफॉयड पीड़ित को तेज बुखार से साथ सिर दर्द, पेट दर्द, भूख मर जाना और शरीर पर गुलाबी बारीक दाने उभरते हैं लेकिन सूंघने और स्वाद की शक्ति बनी रहती है व आक्सीजन का स्तर भी नहीं घटता। कोरोना बुखार की वजह वायरस है जबकि टाइफॉयड एक बैक्टीरिया से होता है। कोरोना वायरस नाक और मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है तथा चार से सात दिन में गले और फेफड़ों को संक्रमित कर गम्भीर हालात बना देता है। नाक और गला संक्रमित होने से खांसी, जुकाम,   बुखार के साथ सूंघने तथा स्वाद लेने की क्षमता चली जाती है,  फेफड़ों में वायरस की संख्या बढ़ने पर सूजन होने से सांस लेने में… Continue reading जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर

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