सौभाग्य के लिए वट वृक्ष परिक्रमा
वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्वबोध के प्रतीक के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। वट वृक्ष ज्ञान व निर्वाण का भी प्रतीक है। भगवान बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे तपस्या, आराधना कर अपने मृत पति को यमराज से वापस पाने में सफलता पाई थी। वट वृक्ष अपनी विशालता के लिए भी प्रसिद्ध है। 6 मई- वट सावित्री अमावस्या व्रत पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, संतान सुख, दाम्पत्य जीवन में प्रेम, स्थिरता और परिवार की उज्ज्वल भविष्य व खुशहाली के लिए देश के अधिकांश क्षेत्रों में विवाहित स्त्रियों के द्वारा...