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  • ‘विकसित भारत’ में तैरती ‘लेम्बोर्गिनी’!

    मानसून की पहली असली बारिश और राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सबसे यादगार तस्वीर। गुरुग्राम की सबसे पॉश गोल्फ कोर्स रोड मानो नदी बन गई थी। बीसियों करोड़ रुपये की एक लेम्बोर्गिनी पानी में डूबी, जिसे एक आलीशान रिहायशी टावर के जलमग्न बेसमेंट से क्रेन के सहारे बाहर निकाला जा रहा था। कुछ ही क्षण बाद दूसरा वीडियो सामने आया। डूबी सड़क के ऊपर किसी घर की ऑटोमेटिक आवाज़ बार-बार गूँज रही थी—“पानी की टंकी भर गई है। मोटर बंद कर दीजिए।” बस, एक ही फ्रेम में ‘विकसित भारत’ का पूरा रूपक मौजूद था। चारों ओर वही गुरुग्राम, जिसे रियल एस्टेट के...

  • 2026 में पराश्रित ‘विकसित भारत’!

    कुछ-कुछ 2025 जैसा ही 2026 में संभव। ऊपर से भौकाल मचाते आंकड़े वही जमीनी असलियत में खोखला। विश्व बाजार में पिछले साल भारत का रुपया लुढ़का वही आर्थिकी तथा बाजार की रौनक चीनी कारखानों के उत्पादों पर आश्रित। वैश्विक वास्तविकताओं में यह हमेशा सुना गया है कि जो विकसित है या विकसित होता हुआ है तो उसकी करेंसी उसी अनुपात में मंहगी, मूल्यवान होती है। वहां के नागरिकों के पासपोर्ट का मान बढ़ता है। पर मोदी राज के हवाबाज ढोलों का कमाल है जो रुपया, निर्यात लुढके, बेरोजगारी बढ़ी मगर फिर भी ब्रिटेन, जापान, जर्मनी सभी को भारत पछाड़ता हुआ।...

  • असल तो नजरिया बदला

    मनरेगा के जी राम जी में बदलने से निवेशकों और धनी इलाकों के किसानों को सस्ती दर पर मजदूर मिल सकेंगे। मनरेगा से इसमें बाधा आई थी और यह इन तबकों की इस कानून से आरंभ से ही एक बड़ी शिकायत थी।  मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम) को वीबी- जी राम जी (विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन- ग्रामीण) में बदलने के नरेंद्र मोदी सरकार के इरादे में नागरिकों के प्रति उसके नजरिये की झलक देखी जा सकती है। मनरेगा उस दौर में बना, जब तत्कालीन यूपीए-1 सरकार ने विकास की अधिकार आधारित अवधारणा को अपनाया...