West Bengal SIR

  • कौन है 27 लाख 4,283 मतदाताओं के नरसंहार का दोषी? मोदी, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट या विपक्ष?

    विश्व इतिहास में, और खासकर लोकतांत्रिक देशों के इतिहास में ऐसे नरसंहार की कोई मिसाल नहीं है। इस नाते मई 2026 में ‘जीवित’ मतदाताओं को ‘मृत’, संदिग्ध दिखा, उन्हें डिलीट करके पश्चिम बंगाल में चुनाव होना लोकतंत्र का कलंक है। जबकि भारत अपने को न केवल गणतंत्र का जनक बताता है, बल्कि सबसे बड़ा लोकतंत्र भी कहता है। उसी लोकतंत्र का ताजा सत्य क्या है? 27 लाख 4,283 लोग सशरीर और मय कागज के जिंदा तथा वोट देने के अधिकारी थे और हैं। फिर भी इन जीवित मनुष्यों को कुएं में फेंक कर चुनाव हुए। हाल में लंदन की वैश्विक...

  • बंगाल में आखिर लाखों लोग छूट गए

    पश्चिम बंगाल में सब कुछ अभूतपूर्व हो रहा है। पहली बार ऐसा हुआ कि मतदान के लिए प्रचार समाप्त होने और साइलेंट पीरियड शुरू होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़े गए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तार्किक विसंगति के आधार पर जिन 27 लाख लोगों के नाम कटे हैं उनके नाम जैसे जैसे ट्रिब्यूनल से क्लीयर हों वैसे वैसे उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाए और पूरक मतदाता सूची जारी की जाए। सर्वोच्च अदालत ने पहले चरण के लिए यह सीमा 21 अप्रैत तक तय की थी और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तक की...

  • सवालों से बेपरवाह

    पश्चिम बंगाल में जिन अर्जियों पर अगले 18 दिन में फैसला नहीं हो पाएगा, उनसे संबंधित मतदाताओं के अधिकार की उपेक्षा करते हुए चुनाव कराना किस लिहाज से उचित माना जाएगा? एक भी नागरिक के मताधिकार का हनन अवांछित है। पश्चिम बंगाल में 60 लाख व्यक्तियों के मताधिकार पर अंतिम निर्णय हुए बिना निर्वाचन आयोग ने राज्य विधानसभा के चुनाव कार्यक्रम का एलान कर दिया है। ये वो लोग हैं, मतदाता सूची में जिनके नाम पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान विवाद खड़ा हुआ। उनसे संबंधित अर्जियां विचाराधीन हैं, जिन्हें निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर न्यायिक...