women reservation

  • महिलाओं के मतदान व्यवहार पर असर नहीं

    महिला आरक्षण के लिए बनाए गए नारी शक्ति वंदन कानून में बदलाव नहीं हो सका और इससे महिलाओं को विधानसभाओं व लोकसभा में आरक्षण मिलने का रास्ता रूक गया, इससे महिलाएं बहुत नाराज होंगी ऐसा कहने और मानने वाले लोग सिर्फ भाजपा के नेता हैं। बाकी किसी को इस तरह की धारणा पर शायद ही यकीन आए। भाजपा के लोग भी इस पर यकीन नहीं करते हैं लेकिन वे कह रहे हैं क्योंकि उनको ऊपर से कहा गया है और मन को एक झूठी तसल्ली है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में शायद कुछ फायदा हो जाए। वास्तविकता यह...

  • महिला आरक्षण पर इतनी राजनीति क्यों?

    दुनिया में पब्लिक रिलेशन यानी जनसंपर्क के पिता कहे जाने वाले एडवर्ड एल बर्नेस का मानना था कि अगर कोई नेता किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में एक बच्चे का माथा चूमता है तो उससे पहले उसके पास चाइल्ड केयर की कोई अच्छी पॉलिसी तैयार होनी चाहिए। अन्यथा उसका एक्शन सिर्फ ऑप्टिक्स बन कर रह जाएगा। उसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा। अपनी किसी सैद्धांतिक पहल का राजनीतिक लाभ लेने के लिए जरूरी होता है कि उसके पीछे एक ठोस व्यावहारिक आधार हो। अगर इस बुनियादी और बेहद व्यावहारिक सिद्धांत के आधार पर देखें तो स्पष्ट दिखाई देगा कि महिलाओं को 33...

  • सरकार के दांव से विपक्ष का फायदा

    केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का विधेयक इस राजनीतिक एजेंडे के साथ पेश किया था कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में इसका फायदा हो जाएगा। बंगाल मातृ शक्ति की पूजा करने वाला राज्य है और अगर चुनाव से ऐन पहले महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिल गया तो चुनाव में भाजपा को लाभ होगा। सरकार को अंदाजा था कि विधेयक पास नहीं भी हो सकता है फिर भी इसे पेश किया गया तो यह भी मकसद था कि अगर विपक्ष इसका विरोध करता है तो चुनाव में प्रचार करके उसको कठघरे में...

  • ईमानदारी सबसे अच्छी नीति

    विपक्ष के एकजुट रहने का संदेश है कि जनमत की प्रतिक्रिया उभार कर निर्णायक दबाव बनाने की भाजपा क्षमता अब कमजोर पड़ रही है। मगर प्रधानमंत्री इससे बेखबर नजर आए। नतीजतन, राजनीतिक गतिरोध अब और बढ़ेगा। अपने 12 साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी विधायी पराजय का सामना करने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार आत्म-निरीक्षण करे, तो वह विश्वास, पारदर्शिता, और साफ़गोई का महत्त्व बेहतर ढंग से समझ सकती है। मकसद परिसीमन था, तो उस पर महिला आरक्षण का मुलम्मा चढ़ाने क्या जरूरत थी? विपक्ष चकमा खा जाएगा या महिला विरोधी ना दिखने की जुगत में लोकसभा सदस्यों की संख्या...

  • अगले चुनाव से संभव है महिला आरक्षण

    महिला आरक्षण की आड़ में लाया गया परिसीमन का विधेयक संसद में पास नहीं हो सका। एकजुट विपक्ष ने सरकार को हरा दिया। उसके बाद से इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या महिला आरक्षण अब कई बरसों के लिए टल गया? ऐसा नहीं है। अगर सरकार पूरी प्रक्रिया में तेजी ले आए तो आसानी से 2029 के चुनाव में इसे लागू किया जा सकता है। असल में देरी का सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में जब नारी शक्ति वंदन कानून पास कराया था तभी महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन के...

  • विपक्ष को मनोवैज्ञानिक बढ़त

    केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी दोनों को अंदाजा रहा होगा कि संविधान संशोधन का विधेयक पास नहीं होगा। फिर भी उसे पेश किया गया ताकि विपक्ष को महिला विरोधी ठहराया जाए। तीन दिन में सरकार ने यही काम किया। इसका ज्यादा मैसेज पश्चिम बंगाल में देना था, जहां भाजपा का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस से है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मुकाबला ममता बनर्जी से है। पश्चिम बंगाल की संस्कृति मातृ पूजा वाली है। वहां शक्ति की पूजा होती है और ममता बनर्जी भी मातृ शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए भाजपा को किसी...

  • विपक्ष को क्रेडिट कैसे मिलता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में संविधान के 131वें संशोधन विधेयक पर बोलते हुए कमाल की बात कही। उन्होंने कहा कि उनको क्रेडिट नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष के लोगों को लग रहा है कि इससे भाजपा का या मोदी का कोई राजनीतिक फायदा है तो वे इसका क्रेडिट विपक्ष को देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे पास कराए वे उसका श्रेय विपक्ष को देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे विज्ञापन छपवा कर विपक्ष को क्रेडिट देने के लिए तैयार हैं। लेकिन सवाल है कि विपक्ष को कैसे क्रेडिट मिलता? विपक्ष के लोगों को भी...

  • बहेलिया-बिसात पर भग्नमनोरथी-ब्रह्मास्त्र

    हमारा देश आजकल संविधान, क़ानून, नियम और स्थापित परंपराओं से नहीं, एक व्यक्ति के मन की बात और एक व्यक्ति के मस्तिष्क में कौंधने वाली तरंग के आधार पर चल रहा है। पिछले पौने बारह बरस में हम ने ऊलजुलूल फ़ैसलों की ऐसी अनगनित मिसालें देखी हैं, जिन का सिर-पैर न तो आज तक किसी समझदार की समझ में आया और न कभी आएगा। 1 अरब 47 करोड़ 50 लाख भारतवासियों के पास अपने पर थोपे जा रहे तरह-तरह के निर्णयों को बेबस मुद्रा में मन मसोस कर स्वीकार करते रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। असहमति...

  • सबकुछ चुनाव खातिर

    जाहिर है महिला आरक्षण बहस पश्चिम बंगाल के चुनाव को प्रभावित करने के लिए और अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के चुनाव पर असर डालने के लिए है। संसद और संविधान दोनों जरिया है। संविधान में संशोधन के जरिए नारी शक्ति वंदन कानून बना था और अब ढाई साल के बाद फिर संविधान में 131वें संशोधन का बिल पेश कर दिया गया। उसी कानून को बदलने की कोशिश हुई, जो लागू भी नहीं हो सका था। इसके लिए तीन दिन के विशेष सत्र की घोषणा कर दी गई। वह भी ऐसे समय में जब राज्यों के...

  • उत्तर दक्षिण का स्थायी विभाजन

    जब से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार केंद्र में बनी है तब से उत्तर और दक्षिण का विभाजन किसी न किसी रूप में बढता जा रहा है। कभी भाषा के आधार पर तो कभी वित्तीय आवंटन के आधार पर तो कभी सनातन के नाम पर और अब परिसीमन के नाम पर। सोचें, दक्षिण भारत के राज्यों ने भी परिसीमन को स्वीकार कर लिया था। उन्होंने भी सितंबर 2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन कानून का समर्थन किया था। तब दक्षिण के चार बड़े राज्यों में चार अलग अलग पार्टियों की सरकार थी। तमिलनाडु में डीएमके, आंध्र...

  • महिला आरक्षण : सरकार ने संशोधन विधेयक का मसौदा जारी किया

    केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया। यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य शामिल होंगे।  यह बिल राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या पर 815 की सीमा प्रस्तावित करता है। केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के लिए बिल में कहा गया, "केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिनका चुनाव उस तरीके से किया जाएगा जैसा...

  • बंगाल चुनाव भी ध्यान में है

    महिला आरक्षण लागू करने की जल्दबाजी दिखा रही है कि केंद्र सरकार और भाजपा की नजर में पश्चिम बंगाल का चुनाव भी है। ध्यान रहे पश्चिम बंगाल मातृ शक्ति का वंदन करने वाला राज्य है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद को इसके प्रतीक के तौर पर पेश करती हें। उन्होंने इस बार के विधानसभा चुनाव में महिला सशक्तिकरण का मैसेज देने के लिए ही महिला आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य का मुख्य सचिव बनाया था। हालांकि चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू होते ही उनको पद से हटा दिया। ममता बनर्जी चुनाव प्रचार में इसका मुद्दा बना रही हैं। ऐसा...

  • महिला आरक्षण क्या परिसीमन से अलग होगा?

    इस बात की चर्चा संसद के चालू सत्र के दौरान हो रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की तैयारी हो रही है। ध्यान रहे संसद की नई इमारत में पहला विधेयक नारी शक्ति वंदन कानून पास हुआ था। 2023 के सितंबर में यह विधेयक पास किया गया था। संविधान का 106वां संशोधन विधेयक पास करके महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया। हालांकि उसी समय यह भी प्रावधान किया गया है कि यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। इस वजह...

  • समस्या कहीं गहरी है

    बिना आर्थिक भागीदारी बढ़ाए और सामाजिक परिवेश बदले सिर्फ राजनीति प्रतिनिधित्व देना प्रतीकात्मक महत्त्व भर का साबित हो सकता है। ऐसी अनेक मिसालें अभी मौजूद हैं। अतः महिला आरक्षण की बहस को अधिक बड़ा फ़लक दिए जाने की जरूरत है।  सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को ‘सबसे बड़ी अल्पसंख्यक’ बताया है। अगर इसका अर्थ निर्णय के स्थलों और नीति निर्माण की प्रक्रिया में उपस्थिति से है, तो कोर्ट की राय से सहज सहमत हुआ जा सकता है। वैसे ये टिप्पणी करते हुए जस्टिस बी।वी। नागरत्नम्मा ने आबादी में महिलाओं की संख्या का भी जिक्र किया। कहा कि कुल आबादी में महिलाएं...

  • परिसीमन, महिला आरक्षण 2029 के बाद

    केंद्र सरकार ने जनगणना कराने का ऐलान कर दिया है और उसके साथ ही यह भी ऐलान कर दिया है कि इस बार जनगणना के साथ ही जातियों की गिनती भी होगी। दो चरण में होने वाली जनगणना एक मार्च 2027 को पूरी हो जाएगी। हालांकि इसके आंकड़े आने में समय लगेगा। तभी सरकार की ओर से कहा गया है कि परिसीमन का काम जनगणना से नहीं जुड़ा है। यानी जनगणना अलग होगी और परिसीमन अलग से होगा। माना जा रहा है कि इस बार जनगणना डिजिटल डिवाइसेज के साथ होगी, जिससे अंतिम आंकड़े आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।...

  • परिसीमन और महिला आरक्षण की चिंता

    देश के कुछ बड़े नेताओं को छोड़ दें, जो अपनी सीट बदल कर कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं तो ज्यादातर नेताओं की चिंता बढ़ी हुई है। भाजपा के नेता ज्यादा चिंतित क्योंकि उनको लग रहा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण का इस्तेमाल उनकी टिकट काटने के लिए हो सकता है। ध्यान रहे सरकार अगले साल जनगणना और उसके बाद परिसीमन कराने की तैयारी है। साथ ही महिला आरक्षण लागू होने वाला है। इस वजह से पार्टियों के नेता चिंता में हैं और इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां कम करके आगे के हालात पर चिंता कर रहे हैं। जिन...

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